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नेताओं से ज्यादा लोकप्रिय फ्रांस का 'सुपरचोर'

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फ्रांस में इसी हफ्ते एक फिल्म रिलीज हुई है जो सत्य घटनाओं पर आधारित है। इसकी इन दिनों काफी चर्चा भी हो रही है। ये फिल्म एक चोर के बारे में है जिसका नाम है टोनी मुसलिन।
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चोर के रूप में प्रसिद्ध होने से पहले मुलिसन पेशे से वैन ड्राइवर था। अधेड़ उम्र का मुसलिन न तो देखने में सुंदर और न ही उसकी शख्सियत में कोई आकर्षण था। हां, वो काम के मामले में पक्का था। समय से ऑफिस जाता था और छुट्टियां भी नहीं के बराबर लेता था।

कम आमदनी और अधिकारियों का चहेता न होने के बावजूद उसने किसी तरह से पैसे बचाकर एक फेरारी खरीद ली लेकिन उसके बारे में दोस्तों को नहीं बताया। लेकिन एक दिन उसने वो हरकत की कि हर कोई हैरान रह गया।
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जनता में लोकप्रियता

मुसलिन फ्रांस के सेंट्रल बैंक (बैंक दे फ्रांस) से 9।9 मिलियन पाउंड लेकर भाग गया। समाचार पत्रों में इस बारे में प्रमुखता से खबर छपी। इसे शताब्दी की सबसे बड़ी चोरी करार दिया गया। इसके बाद मुसलिन तो रातों रात लोकप्रिय हो गया।

जनता ने उसकी तुलना रॉबिन हुड से करनी शुरू कर दी। कहा गया कि एक मामूली आदमी ने एक बड़े पूंजीवादी संस्थान को धक्का दिया है। यह ध्यान रखने की बात है मंदी की मार ने फ्रांस को भी अपने शिकंजे मे जकड़ रखा है। लोग कटौती, कॉरपोरेट घरानों के मुनाफे और राजनेताओं के भ्रष्टाचार से काफी परेशान हैं।

हालांकि चोरी के आरोप में मुसलिन पर मुकदमा चलाया गया और 2012 में उसे जेल भेज दिया गया। वो अब भी जेल में है लेकिन जनता उसके मुकदमे को लेकर सरकार से काफी नाराज है।

लोंगों का मानना है कि फ्रांस में भ्रष्ट राजनेताओं को सजा नहीं होती।

राष्ट्रपति फ्रांसवा ओलांड के सहायक जेरोम कजाक पर टैक्स चोरी के आरोप लगे थे। मजे की बात तो ये है कि कजाक ने टैक्स चोरी की बात को स्वीकार भी किया था। इसी तरह एक दूसरे मंत्री ने भी स्वीकार किया था कि उसने 51 लाख पाउंड दूर के एक बैंक में जमा किए हैं।

जनता में बढ़ता असंतोष

कॉरपोरेट घरानों, बैंक, नेताओं, भ्रष्टाचार से ऊब चुकी फ्रांस की जनता अब मुसलिन का साथ दे रही है।

असल जीवन के मुताबिक ही फिल्म में भी दिखाया गया है कि मुसलिन ने चोरी के वक्त किसी तरह की हिंसा नहीं की। फ्रांस की जनता की निगाह में ये अच्छाई का सबूत था। फिल्म देखने गई एक सयानी महिला की प्रतिक्रिया थी, “उसने वही किया जो करना चाहिए था।”

राष्ट्रपित फ्रांसवा ओलांड से तो लोग और भी नाराज हैं। सत्ता में आने से पहले उन्होंने फ्रांस की राजनीति से भ्रष्टाचार को समाप्त करने का वादा किया था लेकिन उनके वादे अधूरे ही रह गए। मसलन राष्ट्रपति ज़ाक शिराक पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई थी लेकिन बाद में उनकी सजा को स्थगित कर दिया गया।

फ्रांस के लोग मानते हैं कि कुछ खास लोगों को कानून से बचाया जा रहा है और ऐसा नहीं होना चाहिए। खासकर फ्रांस का युवा वर्ग मानता है कि देश में भ्रष्टाचार के लिए मुख्य रूप से नेता जिम्मेदार है और वो मुसलिन से भी ज्यादा गलत कामों में शामिल हैं।

बच पाएगा सुपरचोर?

वकील कहते हैं कि इस साल के अंत तक मुसलिन जेल से बाहर आ जाएगा। वो चार साल पहले ही जेल में बिता चुका है। सवाल उठता है कि उन पैसों का क्या हुआ जो मुसलिन ने चुराए थे।

मुसलिन की निशानदेही पर पुलिस ने एक गैराज से करीब 80 लाख पाउंड तो जब्त कर लिया है लेकिन 20 लाख पाउंड अभी भी गायब है। पुलिस का कहना है कि ये पैसे मुसलिन ने कहीं और छिपा रखे हैं जबकि मुसलिन का कहना है कि उसने सारे पैसे गैराज में ही रख दिए थे।

जांच कर्ताओं का दावा है कि मुसलिन ने सबकुछ योजना के मुताबिक किया था। कुछ दिन तक भागने के बाद उसने खुद ही पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण किया था। उसे मालूम था कि बिना हिंसा के चोरी करने की सजा अधिक से अधिक कुछ सालों की जेल हो सकती है।
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हालांकि सरकारी वकील का कहना है कि उसे रिहा करने के बाद भी उस पर निगाह रखी जाएगी।
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