फेसबुक पर आरोप लगा है कि सोशल साइट ने अपने सजेस्टेंड फ्रेंड्स टूल के जरिये आतंकी संगठन आईएसआईएस के हजारों समर्थकों को एक-दूसरे से जोड़ दिया। अमेरिकी एनजीओ काउंटर एक्सट्रीम प्रोजेक्ट (सीईपी) की हालिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
शोधकर्ताओं ने 96 देशों के 1000 आईएस समर्थकों का विश्लेषण किया और पाया कि ये इस्लामिक कट्टरपंथी नियमित रूप से एक दूसरे से रूबरू हो रहे थे। शोधकर्ताओं के मुताबिक सोशल मीडिया का एल्गोरिदम आईएसआईएस के आतंकियों के नेटवर्क की मदद कर रहा था।
आलोचकों के मुताबिक यह फीचर एक जैसी रुचि वाले यूजर को जोड़ने के लिए बनाया गया था। पर इसने आतंकियों को जुड़ने और नेटवर्क बनाने में मदद कर दी। शोधकर्ताओं ने कई कट्टरपंथियों के प्रोफाइल की जांच की थी, इसलिए यह फीचर कई दूसरे कट्टरपंथियों को भी दोस्त के रूप में सुझाने लगा।
सीईपी के राबर्ट पोस्टिंग ने बताया कि फेसबुक ज्यादा लोगों को जोड़ना चाहता है, लेकिन उसने अनचाहे ही ऐसा तंत्र बना दिया, जो कट्टरपंथियों और आतंकियों को एक दूसरे से जुड़ने में मदद कर रहा है। इससे कट्टरपंथी उन लोगों को भी कट्टर बना सकते हैं, जो सिर्फ उत्सुकता वश उनके बारे में जानना चाहते हैं।
शोध में दावा किया गया है कि एक केस में आईएस समर्थक की फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करने के बाद न्यूयॉर्क का एक गैर मुस्लिम छह महीने में कट्टरपंथी बन गया। फेसबुक का कहना है कि वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानव मध्यस्थ के जरिये कट्टरपंथी सामग्री को हटा रहा है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि फेसबुक आक्रामक तरीके से काम कर रहा है जिससे आतंकी साइट का इस्तेमाल न कर सकें। पर यह तकनीकी रूप से इतना आसान नहीं है।