सुरक्षा कारणों के चलते चालक रहित स्वचालित कार के मालिकों के लिए नए ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम बनाने पर विचार करना चाहिए। हालिया शोध में यह सुझाव दिया गया है। यानी स्वचालित कार के मालिकों को नया ड्राइविंग टेस्ट पास करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञ सारा शार्पल्स ने बताया, अब तक माना जा रहा था कि इन कार में बैठने वालों को कार चलाने की जरा भी जरूरत नहीं होगा और वे कार में बैठे-बैठे अपने दूसरे काम कर सकेंगे। पर नए शोध परिणाम की मानें तो नए कानून में ऐसे प्रावधान करने चाहिए कि कार में बैठे ड्राइवर का ध्यान कार की गति पर हो। न की कार में बैठकर वह सोए, पढ़े, फिल्म देखे या दूसरे काम करे।
कार की गति पर ध्यान देने से आपात स्थिति में वह कार को नियंत्रित कर दुर्घटनाओं को टाल सकेगा। शोध के लिए वेंचर कंसोर्टियम ने ब्रिस्टल और साउथ ग्लूस्टरशायर में जाकर जांच की, जहां इन कारों का ट्रायल चल रहा है। हाल में स्वचालित कार हादसे में एक अमेरिकी महिला की मौत के बाद यह शोध किया गया।
सबसे मुश्किल हैंडओवर पीरियड
शोधकर्ताओं ने पाया है कि इन कारों को चलाने में हैंडओवर पीरियड सबसे मुश्किल होगा। यह वह वक्त है, जब ड्राइवर स्वचालित मोड से कार की कमान अपने हाथ में लेगा। इसमें दो सेकेंड का वक्त लगेगा और इस बीच कार 45 मीटर (अगर रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटा हो) की दूरी तय कर जाएगी। इसी वक्त में दुर्घटना की आशंका सबसे ज्यादा होगी।