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इंग्लैंड, ब्रिटेन और यूनाइटेड किंगडम में क्या फर्क है?

Sat, 25 Jun 2016 03:05 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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सबसे ज्यादा भ्रम इस बात पर बनता है कि यूनाइटेड किंगडम एक मात्र द्वीप पर है, हकीकत में ये द्वीपों के बड़े समूह का एक हिस्सा है। भौगौलिक स्थिति पर गौर करें तो ग्रेट ब्रिटेन ( इसे ब्रिटेन के नाम से भी जाना जाता है) उत्तरी सागर और इंग्लिश चैनल के बीच एक टापू है, जो यूरोपीय महाद्वीप से बमुश्किल 20 मील यानी करीब 32 किलोमीटर की दूरी पर है।
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ग्रेट ब्रिटेन 6000 से ज्यादा ब्रिटिश टापूओं का हिस्सा है, जिसमें पश्चिम में आयरलैंड, और छोटे टापुओं एंग्लेसी और स्कायी जैसे नाम शामिल हैं।

देशों के लिहाज से बात करें तो ग्रेट ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड को यूनाइटेड किंगडम कहते हैं। इसे संपूर्ण-प्रभुत्व-सम्पन्न राज्य का दर्जा प्राप्त है। इनमें चार देश इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड शामिल हैं।

यूनाइटेड किंगडम के अंतर्गत आने वाली संसद संपूर्ण-प्रभुत्व-सम्पन्न है, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर हर देश की कुछ हद तक स्वायत्तता है। स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड की संसद आरक्षित मामलों (विदेश नीति, ईयू मेंबरशिप) को यूनाइटेड किंगडम की संसद पर टाल देती हैं। लेकिन न्यायगत मामलों पर अधिकार बनाए रखती हैं, ताकि शिक्षा और आवास संबंधी सरोकारों से निपटा जा सके।
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हर देश की अपनी पहचान और भाषा

एक छत के नीचे ये देश भले ही हों, लेकिन हर एक की अपनी एक पहचान हैं और भाषाएं हैं। उदाहरण के तौर पर पूरे यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है, लेकिन वेल्स की अपनी आधिकारिक भाषा वेल्श है।

रिपब्लिक और आयरलैंड (आयरलैंड का गणराज्य), जो कि उत्तरी आयरलैंड के साथ सीमा साझा करता है, साल 1940 में गणराज्य बनने के बाद से संपूर्ण-प्रभुत्व-सम्पन्न राज्य है। हालांकि ये यूनाइटेड किंगडम से बिलकुल सटा हुआ है, लेकिन रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड यूनाइटेड किंगडम, यूरोपीय यूनियम और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से खुद संबंध और सदस्यता रखता है।

'ब्रिटिश' शब्द अपने आप में भ्रम पैदा करता है। इससे यूनाइटेड किंगडम, ग्रेट ब्रिटेन और पूर्व ब्रिट्रिश साम्राज्य से जुड़ी हुई चीजों का भाव उत्पन्न होता है। हालांकि ये दुनिया की सबसे बड़ी औपनिवेशिक ताकत है, लेकिन साम्राज की पहुंच कम हो गई है।

जिन टापुओं पर चलता है ब्रिटेन का दबदबा

इतना होते हुए भी वर्तमान यूनाइटेड किंगडम की कुछ बची हुई कॉलोनियां हैं, जिन्हें ब्रिटिश विदेशी क्षेत्रों के रूप में जाना जाता है। इनमें से कुछ ब्रिटिश शासन के अधीन हैं और कुछ के पास खुद की सरकार है।

ब्रिटिश शासन के अधीन एंगुइला, बरमुडा, ब्रिटिश अंटार्कटिक टेरीटरी, ब्रिटिश इंडियन ओशियन टेरीटरी, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, केमैन आइलैंड, फॉकलैंड आइलैंड, गिबराल्टर, मोंटसेराट, पिचकैर्न आइलैंड, सैंट हेलेना, सैंट हेलेना डिपेंडेंसीज, साउथ जॉर्जिया और साउथ आइलैंड, टर्क्स और काइकॉस आइलैंड हैं।

बेलीविक ऑफ जर्सी, बेलीविक ऑफ ग्वेर्नसे, आइसिल ऑफ मैन तीने ऐसे टापूओं को विशेष दर्जा क्राउन डिपेंडेंसीज (ताज पर निर्भरता) प्राप्त है। इनके पास खुद की सरकार और प्रशासन तो है लेकिन तक्नीकी तौर पर यूनाइटेड किंगडम इनके लिए जिम्मेदार है। अजीब बात ये है ये टापू यूनाइटेड किंगडम से संबंध रखने के बजाय ब्रिटिश राजशाही से ताल्लुक रखते हैं।
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राष्ट्रमंडल देश

इसके बाद कॉमनवेल्थ रेल्म यानी राष्ट्रमंडल दायरा आता है। इसके अंतर्गत वे देश हैं जो राजशाही का ताज यानी रानी एलिजावेथ को अपना संवैधानिक सम्राट मानते हैं। राष्ट्रमंडल के सदस्य होने के नाते देश खुद की सरकार चलाते हैं, खुद की विदेश नीति चलाते हैं और खुद के फैसले करते हैं, लेकिन यूनाइटेड किंगडम के साथ संबंध बरकरार रखते हैं।

एंटीगिडा और बारबुडा, ऑस्ट्रेलिया, द बहामास, बार्बाडोस, बेलिज, कनाडा, ग्रेनाडा, जमाइका, न्यू जीलैंड, पापुआ न्यू गिनी, सैंट किट्स एंड नेविस, सैंट लूसिया, सैंट विंसेंट एंड द ग्रेनाडाइन्स, सोलोमोन आइलैंड, तुवालू राष्ट्रमंडल दायरे में आते हैं।

तकनीकी तौर पर यूनाइटेड किंगडम खुद भी राष्ट्रमंडल का हिस्सा है।

फिलहाल बहुत से बुद्धिजीवियों के लिए ये बात पहेली बनी हुई है कि यूरोपीय यूनियन और यूनाइटेड नेशन्स एक ही हैं।
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