डेनमार्क सरकार ने फैसला किया है कि वो चर्बी युक्त खाने-पीने के सामानों पर लगाए जाने वाले टैक्स को खत्म करेगी। इस तरह का टैक्स लागू करने वाला डेनमार्क दुनिया का पहला और अकेला मुल्क है।
ये शुल्क पिछले साल लागू किए गए थे। इस प्रावधान के भीतर सरकार ने खाने-पीने के उन सामानों पर शुल्क लगाने का फैसला किया था जिसमें चर्बी की मात्रा 2।3 फीसद से ज्यादा होती थी। इस तरह के शुल्क में दुग्ध उत्पाद, मांस और डिब्बाबंद भोजन की वस्तुएं शामिल थीं।
चीनी पर कर नहीं
टैक्स मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि शुल्क की वजह से खाने-पीने के वस्तुओं की कीमतें और भी मंहगी हो गई हैं जिससे लोगों की नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। अतिरिक्त शुल्क की वजह से डेनमार्क में मक्खन की कीमतें 37 अमेरिकी सेंट तक मंहगी हो गई थीं जबकि कुछ दूसरी चीजों की कीमतों में 2।7 डॉलर तक का इजाफा हो गया था। मंत्रालय ने ये भी कहा कि घरेलू बाजार में चीजों की कीमतें अधिक होने की वजह से लोग पड़ोसी देश जर्मनी में खरीदारी करने लगे हैं।
समझौता
डेनमार्क ने उस प्रस्ताव को भी रद्द कर दिया है जिसके तहत चीनी पर कर लगाया जाना था। मुल्क के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अधिक डेनमार्क की 47 फीसदी आबादी का वजन सामान्य से अधिक है और 13 प्रतिशत लोग मोटापे का शिकार हैं। शुल्क हटाने का फैसला साक्षा सरकार में शामिल दो राजनीतिक दलों के बीच समझौते के बाद लिया गया है। खबरों के मुताबिक सरकार के ताजा फैसले के बाद कई सुपर बाजारों ने चीजों की कीमतें कम करने की घोषणा की है।