कैंब्रिज एनालिटिका के पूर्व कर्मचारी क्रिस्टोफर वाइली ने खुलासा किया है कि उनकी पैरेंट कंपनी एससीएल ग्रुप को भारत में काम करने के लिए साल 2009 से 2010 के बीच हायर किया गया था। उन्हें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में होने वाली ऑनर किलिंग की घटनाओं का आंकलन करने की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि वाइली ने यह नहीं बताया कि एससीएल ग्रुप के इस क्लाइंट का नाम क्या था।
पूर्व शोधकर्ता वाइली ने 122 पेजों के लिखित सबूत को ब्रिटिश संसद के सामने पेश किया। उन्होंने गुरुवार रात को इन सबूतों को पब्लिक कर दिया है। उन्होंने गुरुवार को ब्रिटिश संसद में दावा किया कि कैंब्रिज एनालिटिका ने कांग्रेस के लिए काम किया है। इन सबूतों में वाइली ने बताया कि अक्सर देखा गया है कि स्थानीय पुलिस और मैजिस्ट्रेट के मन में ऑनर किलिंग को अंजाम देने वाले लोगों के प्रति सहानुभूति की भावना रहती है। जिसकी वजह से कानून को लागू करने में कई बार समस्याएं खड़ी हुईं। एससीएल ने अपने क्लाइंट को इन हत्याओं के पीछे की असल वजहों को समझने में मदद की। एससीएल ने स्पेस मैपिंग के जरिए मामले का विश्लेषण किया और ऑनर किलिंग को रोकने में मदद की।
वाइली ने यह भी बताया कि
कैंब्रिज एनालिटिका ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में एंटी-जिहाद प्रोजेक्ट पर काम किया। उन्होंने बताया कि यूके एफसीओ ने कंपनी को 2008 में व्यवहारिक शोध करने के लिए हायर किया ताकि पाकिस्तान में हो रहे हिंसात्मक जिहाद को रोका जा सके। जिसके बाद कंपनी ने कार्रवाई योग्य सिफारिशें दीं जिसका असर एफसीओ के नीति निर्धारण पर पड़ा।