नियंत्रण से बाहर होने के बाद चीन का अंतरिक्ष स्टेशन तियांगोंग-1 सोमवार को ताहिती तट के पास प्रशांत महासागर में समा गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक धरती के वायुमंडल में प्रवेश करने से पहले आग का गोला बने इस अंतरिक्ष स्टेशन की गति 26, 000 किमी प्रति घंटा था। स्कूल बस के आकार का तियांगोंग-1 ग्रीनविच मानक समयानुसार सोमवार सुबह 8:16 बजे धरती के वायुमंडल में दाखिल हुआ। अंतरिक्ष स्टेशन ताहिती द्वीप के तट के पास प्रशांत महासागर में समाने से पहले ही कई टुकड़ों में बंटकर बिखर गया था।
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के विशेषज्ञ होल्गर क्रॉग ने कहा कि धरती के वायुमंडल में दोबारा लौटने की जगह का सटीक अंदाजा लगाना बेहद कठिन होता है। यह प्रशांत महासागर में अनियंत्रित ढंग से पृथ्वी के वायुमंडल में 26,000 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दाखिल हुआ और धधकते हुए टूटता चला गया। तियांगोंग-1 का ज्यादातर हिस्सा आसमान में ही जल गया और शेष टुकड़े दक्षिण प्रशांत महासागर के वीरान इलाके में गिर गए। 10 मीटर के डैने और आठ टन वजन के तियांगोंग-1 स्टेशन को चीन ने 2011 में अंतरिक्ष में प्रयोगों के लिए लांच किया था।
माना जा रहा है कि यह स्टेशन अंतरिक्ष के लिए बनाई गई और धरती के वायुमंडल में लौटने वाली मानव निर्मित चीजों से कहीं अधिक बड़ा था। मार्च 2016 से चीनी अंतरिक्ष एजेंसी का इस स्टेशन से संपर्क टूट गया और तियांगोंग-1 ने धरती पर डाटा भेजना भी बंद कर दिया था।
ब्राजील में गिरने की भविष्यवाणी से मची अफरातफरी
चीनी वैज्ञानिकों को आखिरी क्षण तक यह पता नहीं चला कि तियांगोंग-1 कहां गिरेगा। उन्होंने इसके क्रैश होने से दो घंटे पहले ब्राजील के सबसे अधिक आबादी वाले शहर साओ पाओलो पर गिरने की भविष्यवाणी की, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। क्रैश होने के दो घंटे पहले चीनी वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी से ब्राजील में अफरा-तफरी मच गई। लेकिन नासा और यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी ने इस दावे का खंडन किया। दोनों अंतरिक्ष एजेंसियों ने बताया कि यह समुद्र में क्रैश होने जा रहा है।
स्काईलैब भी इसी तरह हो चुका है क्रैश
तियांगोंग-1 ऐसा पहला अंतरिक्ष स्टेशन नहीं है जो धरती पर गिरा है। इससे पहले नासा द्वारा 1979 में लॉन्च स्काईलैब भी इसी तरह धरती पर क्रैश हो चुका है। स्काईलैब के धरती पर गिरते वक्त खबर आई थी कि यह भारत में गिरेगा। इस कारण देश में काफी अफरातफरी मची थी, लेकिन यह अंतत: प्रशांत महासागर में गिरा। इसी तरह सैल्यूट स्पेस स्टेशन को लेकर भी अनुमान जताया गया था कि यह 1994 तक अपनी कक्षा में रहेगा, लेकिन 1991 में ही यह अपनी कक्षा से बाहर हो गया और धरती पर गिरने लगा।