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क्या 360 घंटे में सीख सकते हैं अंग्रेजी?

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ब्रिटेन में आए प्रवासियों को राजनीतिज्ञ हमेशा यही सलाह देते हैं कि वे अंग्रेजी सीख लें। मगर सवाल यह है कि अच्छी अग्रेजी बोलने के लिए कितना वक्त चाहिए?
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ब्रिटेन में बहुत से ऐसे लोग हैं जिनके लिए मामूली अंग्रेजी भी एक समस्या है। जनगणना के मुताबिक इंग्लैंड और वेल्स में सात लाख 26 हजार लोग ठीक से अंग्रेजी नहीं बोल सकते और एक लाख 38 हजार का कहना है कि वे बिल्कुल अंग्रेजर नहीं जानते।

40 साल की लिंग पांच साल पहले चीन से आईं थीं। उन्हें अंग्रेजी सीखना काफी मुश्किल लगा। उन्होंने कहा, "जब मैं आई थी तो गर्भवती थी तो मैं अगले तीन साल तक घर पर ही रही। मुझे सीखने में ज्यादा वक्त इसलिए लगा क्योंकि मैं बच्चों में ही व्यस्त थी।"
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हालांकि बाद में उन्होंने क्लास करनी शुरू की और अब वो अच्छी अंग्रेजी बोल लेती हैं। वैसे क्लासों के जरिए अंग्रेजी सीखना एक लंबी प्रक्रिया है।

अंग्रेजी बोलने के लिए अब कई पैमाने मौजूद हैं। सरकार चाहती है कि प्रवासियों को नागरिकता देने से पहले कम से कम वे ‘ईएसओएल एंट्री 3’ या ‘बी1 स्तर’ तक अंग्रेजी सीख लें। इसे स्कॉटलैंड में ‘इंटरमीडिएट 1’ स्तर कहा जाता है।

इसे अच्छी बातचीत के लिए जरूरी माना जाता है। हालांकि सरकार ने इसके लिए कोई समय सीमा तय नहीं की है मगर इस स्तर को हासिल करने के लिए 360 घंटे लग जाते हैं।

इस साल जून में ब्रितानी वित्त मंत्री जॉर्ज ओसबॉर्न ने कहा था कि जो लोग अंग्रेजी का कोर्स नहीं करते या अंग्रेजी नहीं बोल सकते उन्हें कल्याणकारी सुविधाओं में कटौती झेलनी पड़ेगी।

कई प्रवासियों के लिए अंग्रेजी है समस्या
मंगलवार को चैनल 4 पर प्रसारित डॉक्यूमेंट्री – आप अंग्रेजी क्यों नहीं बोलते? में चार ऐसे प्रवासियों के बारे में बताया गया है, जो एक साल पहले इंग्लैंड आने के बाद अंग्रेजी से जूझ रहे हैं और इसके लिए वह एक परिवार में भी रहे।

एक कोलंबियाई प्रवासी को अपने घर रखने वाले पब मैनेजर फ्रैडी सिंपसन ने चैनल 4 के प्रोग्राम में कहा कि उन्होंने काफ़ी प्रगति तो की है मगर उन्हें एक हफ्ते से ज्यादा वक्त चाहिए।

सिंपसन ने कहा, "जब वह आए थे, तो वह मिश्रित अंग्रेजी बोलते थे। एक हफ्ते में उन्होंने इसमें काफी सुधार किया। अगर वह दो-तीन महीने तक सही वातावरण में रहें तो मैं कह सकता हूं कि वह बेहतर अंग्रेजी बोल पाएंगे।"

भाषाई कॉलेज के संगठन इंग्लिश यूके के डिप्टी चीफ एक्जीक्यूटिव हुआन जैप्स कहते हैं कि 360 घंटे एक नियम है। तीनों चरणों के लिए 120-120 घंटे चाहिए, जिसकी सरकार उम्मीद करती है।

मगर अंग्रेजी के कोर्स लेने वाले ज्यादातर लोग यूके में रहने वालों के बजाय छात्र हैं। प्रवासियों की शिक्षा का स्तर बहुत अलग-अलग है।

बच्चे जल्द सीखते हैं भाषा
ट्रिनिटी कॉलेज लंदन में अंग्रेजी भाषा विभाग के प्रमुख डॉक्टर एलेन बॉयड कहते हैं, "धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने के लिए तय 120 घंटे एक पारंपरिक सोच है। अगर कोई सच में बहुत उत्सुक है तो वह बहुत तेजी से सीखता है। 11 साल से कम उम्र के बच्चों में यह बात होती है कि वो पूरी तरह रम जाते हैं और छह महीने में पारंगत हो जाते हैं।"

ब्रिटिश काउंसिल के ईएसओएल नेक्सस की डायरेक्टर डॉट पावेल के मुताबिक वयस्क पढ़ने और लिखने में अच्छे हो सकते हैं मगर बच्चे बोलने-सुनने में तेज होते हैं।

स्कूल जब उन्हें नई भाषा सिखाना शुरू करते हैं तो उनके दिमाग आवाजों और स्थानीय भाषा के शब्दों के बीच पूरी तरह तालमेल कर लेते हैं।

भाषा सीखने का अनुभव अलग-अलग
भाषा सलाहकार फिल्डिया शेलकेंस बताती हैं कि जब वह दस साल पहले ऑस्ट्रेलिया में अंग्रेजी भाषा पर शोध कर रही थीं तो वहां 1765 घंटों की बात की जाती थी। इसका मतलब था कि आपको चार साल तक क्लास करनी पड़ेंगी। इसके बाद ही आप एक दफ़्तर में क्लर्क का काम करने लायक बन पाते थे।

इंग्लैंड में 360 घंटों की सीमा बांधने के पीछे कारण हो सकते हैं। मगर वह कहती हैं कि इसे घटाने के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं। उनके मुताबिक़, "हर सरकार इसे घटाती जा रही है। हमें इस पर लगाम लगानी चाहिए। किसी भाषा को सीखने में वक्त लगता है।"

हर प्रवासी का अंग्रेजी सीखने का अनुभव अलग-अलग होता है। 35 साल के थूरा राजनीतिक कारणों से बर्मा से भाग आए थे और 2009 में यूके पहुंचे।

थूरा कहते हैं, "शुरुआत में इस भाषा को समझना बेहद मुश्किल लगता था। मैं ठीक से पढ़ सकता था मगर मुझे बोलने-सुनने में दिक्कत थी।" तीन महीने के बाद उन्हें एक कार घर में काम मिला, जहां उन्होंने सबसे ज्यादा अंग्रेजी सीखने का मौका मिला।

उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से मास्टर्स डिग्री हासिल की और आज एक अस्पताल में काम करते हैं। क्लासों की उतनी अहमियत नहीं है बल्कि आपके आस-पास अंग्रेजी बोलने वालों का होना जरूरी है।

वह बताते हैं, "अगर आप पूरी तरह से अंग्रेजी पर अधिकार जमाना चाहते हैं तो आपको कम से कम आठ महीने लगेंगे।"

जब लिंग चीन से इंग्लैंड आईं तो उनका बड़ा बेटा आठ साल का था। उसकी अलग कहानी है। लिंग कहती हैं, "तीन महीने के बाद वह बहुत अच्छी तरह से बोलने लगा।" लिंग को यकीन है कि इसमें बेटे की कम उम्र ज्यादा मददगार साबित हुई। वह अब 13 साल का है और एक ब्रितानी व्यक्ति की तरह बात करता है।

शिक्षा स्तर का बड़ा योगदान
पॉवेल कहते हैं कि अंग्रेजी सीखने में शिक्षा स्तर सबसे बड़ा योगदान करता है। क्लास रूम में किसी के अशिक्षित होने या डिग्री स्तर तक पढ़ाई करने का काफी फर्क पड़ता है। पॉवेल बताते हैं, "दूसरा बड़ा कारण है कि अगर आप पहले से दो-तीन भाषाएं बोल सकते हैं तो अगली काफी तेजी से सीखेंगे।"

एक बात पर ज्यादातर भाषा विशेषज्ञ एकमत हैं कि सीखने में अंग्रेजी सुनने की काफी बड़ी भूमिका रहती है। अगर कोई सिर्फ़ अपनी ही नागरिकता के लोगों के साथ काम करता है या घर पर अंग्रेजी बोलने वालों से नहीं मिलता तो वह जल्दी नहीं सीख पाएगा।

फिर भी जो प्रवासी दंपती वीजा पर आ रहे हैं, वे कम से कम पहले साल मुफ्त अंग्रेजी क्लास नहीं कर सकते। पॉवेल के मुताबिक़, "एक साल तक तो आपको खुद ही सीखना होगा जब तक कि आपका साथी इसकी फीस चुकाना शुरू न कर दे।"

तो क्या इसका भी कोई कट-ऑफ बिंदु है कि इसके बाद आप कभी भी भाषा पर अधिकार नहीं जमा सकते?

लिंग को अब भी उम्मीद है कि वह अपने बेटे की तरह बेहतर अंग्रेजी बोल सकती हैं। मगर थूरा कहते हैं कि बेहद आरामपसंद लोगों के लिए भी उच्चारण एक बड़ी समस्या है। "मेरे लिए भाषा बोलने का लहजा छोड़ना तकरीबन नामुमकिन है। हां, अगर कोई 10 साल की उम्र में यहां आता है तो उसके लिए यह संभव होगा।"

भाषा बोलने में दूसरे लोगों का लहजा भी बड़ी बाधा है। थूरा का कहना है, "मैं मैनचेस्टर यूनाइटेड का समर्थक हूं पर मैं सर एलेक्स फर्ग्यूसन को नहीं समझ पाता। स्कॉटिश लहजे को समझना तो और भी मुश्किल है।"
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