कई भारतीय बैंकों को 9000 करोड़ रुपए का चूना लगाकर ब्रिटेन जा भागे भारतीय शराब कारोबारी विजय माल्या की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। ब्रिटेन की जांच एजेंसी एसएफओ के हाथ कुछ ऐसे सबूत मिले हैं, जो इस ओर इशारा करते हैं कि हो सकता है कि माल्या ने अपने कालेधन को सफेद करने के लिए 'मनी लॉन्ड्रिंग' का सहारा लिया है।
जांचकर्ता इस बात का पता लगा रहे हैं कि माल्या ने लॉन्ड्रिंग के जरिए अपने कालेधन को सफेद करने के लिए ब्रिटेन की कई कंपनियों में निवेश किया है।
सूत्रों के मुताबिक, एसएफओ के हाथ कुछ ऐसे सबूत हाथ लगे हैं, जिनसे पता चलता है कि माल्या बिट्रेन में मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल है। एसएफओ ने माल्या के बैंक डीटेल और विभिन्न कंपनियों किए गए निवेश और उनके शेयर्स के दस्तावेज इकट्ठा किए हैं।
एसएफओ की फाइनेंस जांच एजेंसी ने माल्या और उन ब्रिटिश कंपनियों के खिलाफ एक स्वतंत्र जांच शुरू करने का फैसला किया है, जिनपर शक है कि उन्होंने माल्या का पैसा अपनी कंपनियों में लगाया है।
ब्रिटेन के अधिकारियों ने भारत को इस बात की सूचना दे दी है कि वो माल्या के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने के आधार पर जांच कर रहा है। अधिकारियों ने सीबीआई और ईडी से माल्या की संपत्ति की जानकारी मांगी है।
भारतीय सरकारी सूत्रों का कहना है कि एसएफओ की कार्रवाई से भारत का केस मजबूत होगा। फिलहाल माल्या के खिलाफ भारत ब्रिटेन के वेस्टमिंस्टर कोर्ट में केस लड़ रहा है।