एक अनुमान के मुताबिक इंग्लैंड और वेल्स में हर साल 85,000 महिलाएं और 12,000 पुरुष बलात्कार का शिकार होते हैं।
ये ऐसा मुद्दा नहीं है जिस पर कोई खुल कर बात करे। लेकिन एक महिला ने अपनी पहचान छिपाए बिना ही अपनी कहानी सुनाने की हिम्मत की।
"मेरी पहचान ये नहीं है कि मेरा बलात्कार हुआ। मैं जूलियट हूं लेकिन मैं हमेशा के लिए बदल गई हूं।"
2011 में मैनचेस्टर में नए साल की पार्टी के बाद जब जूलियट बार से निकलीं, तो उन पर एक अनजान व्यक्ति ने हमला किया और उनके साथ बलात्कार किया।
इस हादसे ने इनकी ज़िदगी बदल कर रख दी।
"आपकी ज़िंदगी में एक हादसा ऐसा होता है जिसके बाद आपकी ज़िंदगी सामान्य नहीं रहती। शायद आप एक असाधारण व्यक्ति बन जाते हैं, क्योंकि आप ऐसे हादसों से उबरते हैं। और शायद मैं भी अब किसी न किसी तरह इससे उबरने की कोशिश कर रही हूं।"
वे मैनचेस्टर के एक बार में अकेले गई क्योंकि उनकी दोस्त उनके साथ नहीं आई। थोड़ी शराब पी लेने के बाद उन्हें इतना नशा महसूस हुआ कि उन्हें बाहर निकलने के लिए भी दूसरों की मदद लेनी पड़ी।
इंसाफ की लड़ाई
बार से बाहर निकलने के बाद जो उनके साथ हुआ, उसका कोई चश्मदीद नहीं था और जूलियट को भी पूरा घटनाक्रम ठीक से याद नहीं।
जैसे-जैसे सुबह हुई, जूलियट को दर्द का अहसास होने लगा जिसके बाद उन्हें इस बात का अंदाज़ा हुआ कि उनके साथ क्या हुआ।
उन्होंने पुलिस को फोन किया जिन्होंने सलाह दी कि वे क्लिक करें बलात्कार पीड़ितों के लिए बने सेंट मेरी नाम के एक चिकित्सकीय सलाह सेंटर में पूरा ब्यौरा दें, ताकि कार्रवाई शुरू की जा सके।
बलात्कार की घटना होने से लेकर अदालत में मामला पहुंचने तक काफी समय लग जाता है, और आमतौर पर पीड़ित लोग अपने इंसाफ की लड़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं।
सेंट मेरी जैसे सेंटर पीड़ितों को यही लड़ाई लड़ने के लिए मानसिक सहायता देते हैं।
बलात्कार की घटना के बाद खुद को नहाने से रोकना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन सबूत इकट्ठा करने की दृष्टि से इसे बेहतर समझा जाता है।
जूलियट का चेकअप एक महिला डॉक्टर ने किया।
पेचीदा मामला
उन्होंने बताया, “भले ही मेरे लिए ये एक मुश्किल घड़ी हो, लेकिन वे मेरा चेकअप बहुत नर्मी से करेंगी। पुराने समय में तो ऐसे मामलों में पुलिस स्टेशन में मौजूद पुरुष डॉक्टर ही महिलाओं का चेकअप करते थे। उस स्थिति के बारे में सोचना भी भयावह है।”
जूलियट के डीएनए सैंपल ले लिए गए और मेडिकल टीम को उनके शरीर पर खरोचों के निशान भी मिले।
इसके अलावा एक पुरुष के क्लिक करें शुक्राणु के अंश भी पाए गए जिससे साबित हुआ कि जूलियट के साथ किसी ने बलात्कार किया है।
3 जनवरी 2012 के दिन वे पुलिस स्टेशन गई जहां उनका बयान लिया गया।
आमतौर पर 90 प्रतिशत बलात्कार पीड़ितों के साथ दुष्कर्म करने वाले लोग उनकी जान-पहचान के ही होते हैं, लेकिन जूलियट का मामला पेचीदा था।
जूलियट पर हुए हमले की जांच के बाद मुस्तफा यूसुफ नाम के एक 20 वर्षीय पुरुष को हिरासत में लिया गया।
लंबी पूछताछ के बाद मुस्तफा ने ये माना कि उन्होंने जूलियट के साथ दुष्कर्म किया, लेकिन उन्होंने साथ ही ये कहा कि वे उस समय नशे में थे और ये सब जूलियट की मर्ज़ी से हुआ।
लेकिन उस रात की सीसीटीवी फुटेज में ये प्रतीत हुआ कि वे नशे की हालत में नहीं थे जबकि जूलियट इतने नशे में थी कि ऐसी अवस्था में कोई अपनी मर्ज़ी से सेक्स नहीं कर सकता। और फिर मामला कोर्ट में आगे बढ़ा।
'खुद को क्यों दे दोष?'
ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस की एलिसन मच ने कहा कि ये ज़रूरी है कि पीड़िता शराब के नशे में होने के लिए खुद को दोष न दे।
उनका कहना था, “अगर आपके घर में चोरी होती है, तो आप खुद को ये कह कर दोष नही दे सकते कि आप सोने से पहले ताला लगाना भूल गए। आप उस चोर को ये कह कर सही नहीं ठहरा सकते कि गलती आपकी थी।”
आंकड़ों के मुताबिक बहुत से बलात्कार पीड़ित पुलिस को रिपोर्ट नहीं करते।
इंग्लैंड और वेल्स के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक हर साल 4,73,000 लोग यौन उत्पीड़न का शिकार होते हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ 53,700 मामले ही 2011-12 में पुलिस के पास दर्ज किए गए।
इनमें से औसतन 5,620 अभियुक्तों को ही सज़ा हुई।
सर्वेक्षणों के मुताबिक जब एक बलात्कार का मामला अदालत में जाता है, तो करीब 62 प्रतिशत मामलों में अभियुक्त को सज़ा हो पाती है, जबकि 38 प्रतिशत मामलों में अभियुक्त को बरी कर दिया जाता है। जूलियट की मानसिक स्थिति पर इस हमले का गहरा असर हुआ।
ख़ौफ़
वे बताती हैं, “मैं पास के बाज़ार में भी नहीं जा पाती थी और डरते-बिलखते हुए घर वापस भाग आती थी। ऐसा महसूस होता था कि जैसे खुद पर कोई दाग लग गया हो और कुछ भी छूने की कोशिश करूंगी तो वो भी दूषित हो जाएगी।”
हादसे के छह महीने बाद जूलियट ने अदालत में सबूत दिए और सेंट मेरी सेंटर ने इस दौरान उनका पूरा साथ दिया।
उन दिनों को याद करते हुए जूलियट कहती हैं, “वो शायद मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी चुनौती थी और सबसे भयावह भी। लेकिन जितना मैंने सोचा था, ये अनुभव उतना डरावना नहीं था।”
यूसुफ को बलात्कार के मामले में सात साल और नौ महीने की सज़ा हुई।
जब अदालत में मामला खत्म हुआ, तो जूलियट पुलिस स्टेशन पहुंची। वे अपने वो जूते वहां से उठाने गई थीं, जो उन्होंने उस रात पहने थे। पुलिस को ये देख कर अचंभा हुआ।
लेकिन जूलियट ने इसके पीछे की वजह बताते हुए कहा, “मैंने कहा कि ये मेरे खूबसूरत, प्यारे और महंगे जूते हैं। मेरे जूतों ने मेरा बलात्कार नहीं किया, इसलिए मुझे वो वापस चाहिए। मेरे इस बयान पर पुलिस की प्रतिक्रिया अजीब ही थी।”
बलात्कार पीड़ित के हाथों से नियंत्रण छिन जाता है, लेकिन अपने जूते एक बार फिर पहन कर जूलियट अपने भविष्य की ओर कदम रख सकती हैं।