पिछले 30 सालों में यूरोप में पक्षियों की संख्या बहुत तेजी से घटी है। एक नए अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि इतने सालों में पक्षियों की आबादी में 42 करोड़ की कमी आई है।
इनमें ज्यादातर घरों में पाए जाने वाले गौरेया, मैना, स्काईलार्क जैसी आम प्रजातियों के पक्षी शामिल हैं। इन जैसी सबसे ज्यादा प्रचलित 36 प्रजातियों की आबादी में 90 फीसदी की कमी आई है।
शोधकर्ताओं ने इसके लिए खेती के आधुनिक तौर-तरीकों, मौजूदा पर्यावरण और पक्षियों के प्राकृतिक आवास को पहुंचने वाले नुकसान को जिम्मेदार बताया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, ये यूरोप के पक्षियों की चेतावनी है।
इससे बिल्कुल साफ है कि हम जिस तरह से पर्यावरण का संरक्षण कर रहे हैं, वे पक्षियों की आम प्रजातियों के लिए नुकसानदेह हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर के रिचर्ड इंगर ने कहा कि पक्षियों की आम प्रजातियों की संख्या में इतनी तेजी से कमी आना काफी चिंताजनक है, क्योंकि यह पक्षियों का वह समूह है जिनसे लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होता है।
ऐसे में अगर यही स्थिति रही तो मानव समाज को कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। जर्नल इकोलॉजी लेटर्स में प्रकाशित इस अध्ययन में कुछ दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों की संख्या में इजाफा होने की बात भी सामने आई है।
इसे पक्षियों से जुड़े संरक्षण के प्रयासों का नतीजा माना जा रहा है। शोधकर्ताओं ने आम प्रजाति की पक्षियों के संरक्षण पर भी ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है। इस अध्ययन के तहत 25 देशों में यूरोपीय पक्षियों के 144 प्रजातियों पर किए गए सर्वे को शामिल किया गया है।