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सुपर फास्ट व छोटे कंप्यूटरों का रास्ता खोलने पर 3 वैज्ञानिकों को मिला भौतिकी का नोबेल

Tue, 04 Oct 2016 10:49 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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अबूझ अवस्था वाले तत्व की उलझन सुलझाकर भविष्य में सुपरफास्ट और छोटे कंप्यूटरों का रास्ता बनाने वाले तीन वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से इस साल का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। ब्रिटेन के वैज्ञानिक डेविड थौलेस, डंकन हाल्डेन और माइकल कोस्टरलिट्ज के नाम की घोषणा करते हुए नोबेल समिति ने कहा कि इस साल के विजेताओं ने एक अंजान दुनिया का दरवाजा खोला है जहां पदार्थ अजीबोगरीब अवस्था को प्राप्त कर सकते हैं। तीनों वैज्ञानिक अमेरिका में गणित के उच्च विशेषज्ञता वाले टोपोलॉजी विभाग से जुड़े हैं।
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इन वैज्ञानिकों की खोज बताती है कि रहस्यमयी तत्व कई रूपों में मौजूद हो सकते हैं। इससे नए तत्वों की डिजाइनिंग में मदद मिलेगी। तीनों वैज्ञानिकों ने सुपरकंडक्टरों, सुपरफ्लूइड्स या पतली चुंबकीय फिल्मों के समान पदार्थों के असामान्य चरणों की खोज के लिए एडवांस गणितीय मॉडल का उपयोग किया। समिति के मुताबिक उनकी यह खोज नई पीढ़ी के सुपर कंडक्टर, तत्व विज्ञान और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बहुत प्रासंगिक और उम्मीद से लबरेज है। भविष्य में यह खोज क्वांटम कंप्यूटर्स के क्षेत्र में भी काफी उपयोगी साबित होगी। नोबेल समिति ने इस खोज पर उन्हें शुक्रिया भी कहा।

टोपोलॉजी गणित की एक ऐसी शाखा है जिसमें पदार्थों के भौतिक गुणों का अध्ययन किया जाता है। 1970 से पहले माना जाता था कि पदार्थों के भौतिक गुण उसमें होने वाले प्रसार के साथ बदल जाते हैं। इसमें विरूपित बलों के तहत ऐसे स्थान का अध्ययन भी किया जाता है जिसमें कोई बदलाव नहीं हुआ होता है। डॉ. कोस्टरलिट्ज और डॉ. थौलेस ने दिखाया कि सुपरकंडक्टिविटी निम्न तापमान पर भी हो सकती है। उन्होंने इसके तौर तरीके और चरणबद्ध बदलाव को भी विस्तार के साथ प्रदर्शित किया और बताया कि सुपरकंडक्टिविटी ऊंचे तापमान पर गुम हो जाती है। व्यावहारिक रूप से यह गुण भविष्य में कॉमन मटेरियल को टोपोलॉजिकल अवस्था में लाने में मदद करेंगे जिसके तहत सूचना और ऊर्जा को बहुत छोटे से स्थान में बिना अधिक गर्मी के समाहित किया जा सकता है। 
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भविष्य में ऐसे खुलेगी नई राह

निम्न तापमान पर सुपरकंडक्टिविटी की पहचान और इसके चरणबद्ध बदलाव के चलते ऊंचे तापमान पर इसका गुम हो जाना भविष्य में कई सामान्य तत्वों को टोपोलॉजिकल अवस्था में ला पाने में मदद करेगा। चूंकि ऐसा होने पर सूचना तथा ऊर्जा को बिना गर्म हुए बहुत ही छोटी स्पेस में रखा जा सकता है इसलिए यह अवस्था इलेक्ट्रॉनिक के क्षेत्र में क्रांति ला सकती है। क्वांटम कंप्यूटर के विकास में यह तकनीकी काफी क्रांतिकारी साबित होगी।

इस तरह बंटेगी पुरस्कार की राशि
नोबेल पुरस्कार विजेता तीनों वैज्ञानिकों को 80 लाख स्वीडिश क्रोनॉर की राशि मिलेगी जो 9 लाख 31 हजार अमेरिकी डॉलर के बराबर है। यह राशि तीनों वैज्ञानिक आपस में साझा करेंगे। थौलेस को पुरस्कार राशि का आधा हिस्सा मिलेगा जबकि हाल्डेन और कोस्टरलिट्ज को शेष राशि में से आधा-आधा हिस्सा साझा करना पड़ेगा।

बीतें बर्षों में इन्हें मिला है भौतिकी का नोबेल
-2015 में न्यूट्रिनो के अस्तित्व उसके स्पंदन और द्रव्यमान को साबित करने वाले जापानी वैज्ञानिक तकाकी तातिजा और कनाडा के ऑर्थर बी. मैकडॉनल्ड को मिला था। इससे पहले न्यूट्रिनो का अस्तित्व पक्के तौर पर पता नहीं था।
-2014 में जापानी वैज्ञानिकों इसामू आसासाकी और हिरोशी अमानो तथा अमेरिका के शुजी नाकामुरा को ऊर्जा की खपत कम करने व पर्यावरण अनुकूल बिजली का स्रोत एलईडी का आविष्कार करने के लिए दिया गया था।
-2013 में ब्रिटेन के 80 साल के वैज्ञानिक पीटर हिग्सऔर बेल्जियम के फ्रांसोआ आंग्लेया को भौतिकी का नोबेल अवार्ड दिया गया था।
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