अबूझ अवस्था वाले तत्व की उलझन सुलझाकर भविष्य में सुपरफास्ट और छोटे कंप्यूटरों का रास्ता बनाने वाले तीन वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से इस साल का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। ब्रिटेन के वैज्ञानिक डेविड थौलेस, डंकन हाल्डेन और माइकल कोस्टरलिट्ज के नाम की घोषणा करते हुए नोबेल समिति ने कहा कि इस साल के विजेताओं ने एक अंजान दुनिया का दरवाजा खोला है जहां पदार्थ अजीबोगरीब अवस्था को प्राप्त कर सकते हैं। तीनों वैज्ञानिक अमेरिका में गणित के उच्च विशेषज्ञता वाले टोपोलॉजी विभाग से जुड़े हैं।
इन वैज्ञानिकों की खोज बताती है कि रहस्यमयी तत्व कई रूपों में मौजूद हो सकते हैं। इससे नए तत्वों की डिजाइनिंग में मदद मिलेगी। तीनों वैज्ञानिकों ने सुपरकंडक्टरों, सुपरफ्लूइड्स या पतली चुंबकीय फिल्मों के समान पदार्थों के असामान्य चरणों की खोज के लिए एडवांस गणितीय मॉडल का उपयोग किया। समिति के मुताबिक उनकी यह खोज नई पीढ़ी के सुपर कंडक्टर, तत्व विज्ञान और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बहुत प्रासंगिक और उम्मीद से लबरेज है। भविष्य में यह खोज क्वांटम कंप्यूटर्स के क्षेत्र में भी काफी उपयोगी साबित होगी। नोबेल समिति ने इस खोज पर उन्हें शुक्रिया भी कहा।
टोपोलॉजी गणित की एक ऐसी शाखा है जिसमें पदार्थों के भौतिक गुणों का अध्ययन किया जाता है। 1970 से पहले माना जाता था कि पदार्थों के भौतिक गुण उसमें होने वाले प्रसार के साथ बदल जाते हैं। इसमें विरूपित बलों के तहत ऐसे स्थान का अध्ययन भी किया जाता है जिसमें कोई बदलाव नहीं हुआ होता है। डॉ. कोस्टरलिट्ज और डॉ. थौलेस ने दिखाया कि सुपरकंडक्टिविटी निम्न तापमान पर भी हो सकती है। उन्होंने इसके तौर तरीके और चरणबद्ध बदलाव को भी विस्तार के साथ प्रदर्शित किया और बताया कि सुपरकंडक्टिविटी ऊंचे तापमान पर गुम हो जाती है। व्यावहारिक रूप से यह गुण भविष्य में कॉमन मटेरियल को टोपोलॉजिकल अवस्था में लाने में मदद करेंगे जिसके तहत सूचना और ऊर्जा को बहुत छोटे से स्थान में बिना अधिक गर्मी के समाहित किया जा सकता है।