ब्रिटिश विदेश एवं राष्ट्रमंडल कार्यालय (एफसीओ) ने करीब 195 फाइलें नष्ट कर दी हैं। इनमें वे दस्तावेज भी शामिल हैं जो लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल इलम (लिट्टे) के नेतृत्व में गृह युद्ध छिड़ने के दौरान श्रीलंका और भारत के बीच रहे संबंधों से जुड़े थे। ब्रिटेन के इस कदम से शोधकर्ता और पुरालेखपाल चिंता में हैं।
एफसीओ का कहना है कि फाइलें नष्ट करने का कोई भी फैसला उक्त देश की रिकॉर्ड नीति के आधार पर लिया जाता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि फाइलों के नष्ट होने का मतलब यह है कि इतिहास के किसी महत्वपूर्ण दौर का कोई रिकॉर्ड ही नहीं रहेगा। ऐसा माना जाता है कि साल 1978 से 1980 के बीच लिट्टे संकट के दौरान ब्रिटेन की एमआई-5 और सीक्रेट एयर सर्विस (एसएएस) ने श्रीलंका के सुरक्षा बलों को परामर्श दिया था। पत्रकार और शोधकर्ता फिल मीलर ने ‘फ्रीडम ऑफ इन्फॉर्मेशन रिक्वेस्ट’ के तहत जानकारी मांगी थी जिसके बाद पता चला था कि ये फाइलें गायब हैं।
मीलर ने बताया कि ‘नष्ट किए गए दस्तावेजों में से दो का नाम ‘श्रीलंका/इंडिया रिलेशंस’ थे और यह 1979 से 1980 के बीच के हैं।’ ऐसा माना जा रहा है कि इन दस्तावेजों में श्रीलंका के साथ भारत के संबंधों की जानकारी है, इसमें उस दौरान भारत के शांति रक्षा बल के काम से जुड़ी जानकारी भी है।