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Europe: यूरोप बना आग का मैदान, तीन लाख लोग घर छोड़ने को मजबूर; लपटों ने दिखाया विकराल रूप; तोड़े सारे रिकॉर्ड

Sat, 01 Aug 2026 07:24 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला नेटवर्क, पेरिस/मैड्रिड

सार

यूरोप में भीषण जंगलों की आग ने नए रिकॉर्ड बना दिए हैं। फ्रांस, स्पेन और ग्रीस में तीन लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए, जबकि 4.34 लाख हेक्टेयर से ज्यादा वन क्षेत्र आग की चपेट में आ चुका है।

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यूरोप में जंगल की आग से सबसे ज्यादा फ्रांस और स्पेन प्रभावित। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूरोप में इस वर्ष जंगलों की भीषण आग ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जहाँ फ्रांस, स्पेन और ग्रीस जैसे देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुँच गया है, लाखों लोग घर छोड़ने को मजबूर हैं। द गार्जियन के अनुसार पूरे दक्षिणी यूरोप (मुख्यतः फ्रांस, स्पेन, इटली और ग्रीस) में भीषण आग और लू (हीट वेव) के कारण 3 लाख से अधिक लोगों और पर्यटकों को अपने घरों तथा होटलों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेनी पड़ी है। अकेले फ्रांस के दक्षिण-पश्चिमी बोर्डो, जिरोंद और लांडेस इलाकों से 2,24,000 से अधिक लोगों को निकाला गया।

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यूरोपीय वन अग्नि सूचना प्रणाली के ताजा अपडेट के अनुसार, इस साल अब तक यूरोप में 4,34,976 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि तबाह चुकी है। आग के कारण इस साल अब तक 1.79 करोड़ टन कार्बन वायुमंडल में उत्सर्जित हो चुकी है, जो सामान्य औसत से लगभग दोगुनी है।  अलजजीरा के मुताबिक अकेले स्पेन में इस महीने की आग में झुलसने से 14 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 10 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि दक्षिणी यूरोप का अग्नि परिदृश्य तेजी से अमेरिका के कैलिफोर्निया जैसा बन रहा है, जहां हर वर्ष विशाल और बेकाबू वनाग्नियां सामान्य होती जा रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वर्ष मई से लगातार पड़ रही भीषण गर्मी और लंबे सूखे ने जंगलों तथा घास के मैदानों को इतना शुष्क बना दिया कि वे मामूली चिंगारी से भी भड़क उठे।
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अग्निशमन व्यवस्था पर भारी पड़ने लगा जलवायु संकट
पिछले तीन दशकों में दक्षिणी यूरोप में वनाग्नि की घटनाओं में कमी दर्ज की गई थी। इसका श्रेय बेहतर अग्निशमन व्यवस्था, अत्याधुनिक विमान और हेलीकॉप्टर, दमकलकर्मियों के उन्नत प्रशिक्षण तथा जनजागरूकता अभियानों को दिया जाता है। इन प्रयासों ने लंबे समय तक आग पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखा लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अब जलवायु परिवर्तन के कारण बनने वाली अत्यधिक गर्म, शुष्क और तेज हवाओं वाली परिस्थितियां इन व्यवस्थाओं की क्षमता को चुनौती देने लगी हैं। इस वर्ष फ्रांस और स्पेन में लगी आग ने संकेत दिया है कि कई बार मौसम इतना प्रतिकूल हो जाता है कि आधुनिक अग्निशमन संसाधन भी आग की रफ्तार के सामने बेबस नजर आते हैं।

यूरोप के लिए भविष्य की चेतावनी
विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि पिछले कुछ वर्षों की घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि जंगलों की आग के खतरे का अब तक कम आकलन किया जाता रहा है। लगातार बढ़ता वैश्विक तापमान, बार-बार आने वाली हीटवेव और लंबे सूखे की घटनाएं इस संकट को और गहरा करेंगी। यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ और जंगलों के प्रबंधन की रणनीति में व्यापक बदलाव नहीं किए गए, तो यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ जंगलों की आग अपवाद नहीं, बल्कि हर गर्मी का सामान्य दृश्य बन सकती हैं। इसका असर केवल जंगलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मानव बस्तियों, कृषि, अर्थव्यवस्था, जैव विविधता और राष्ट्रीय सुरक्षा तक महसूस किया जाएगा। यह चेतावनी केवल यूरोप के लिए नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन से जूझ रही पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर संकेत है।

कम घटनाएं, लेकिन कहीं ज्यादा खतरनाक आग
विशेषज्ञों के अनुसार यूरोप में कुल वनाग्नि की घटनाएं पहले की तुलना में कम हो सकती हैं, लेकिन जो आग लग रही है उसका आकार और विनाशकारी क्षमता लगातार बढ़ रही है। पश्चिमी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में अब अपेक्षाकृत कम संख्या वाली बड़ी वनाग्नियां ही कुल जले हुए क्षेत्र के बड़े हिस्से के लिए जिम्मेदार बन रही हैं। स्पेन में खेती और पशु चराई की गतिविधियां घटने से जंगलों में सूखी वनस्पति का बड़ा भंडार जमा हो गया है। दूसरी ओर, वर्षों तक छोटी-छोटी आग को सफलतापूर्वक बुझाने की रणनीति के कारण भी जंगलों में ईंधन का काम करने वाली वनस्पति बढ़ती गई।

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