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यूरोप में विरोध की लहर: अल्बानिया में आठवें दिन भी झड़पें, इटली में सख्त कानून; फ्रांस में कर्फ्यू बढ़ा

Wed, 21 Oct 2026 10:03 AM IST
देवेश त्रिपाठी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोम/पेरिस/तिराना

सार

यूरोप के कई देशों में महंगाई, महंगे ईंधन, आवास संकट और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर विरोध तेज हो गया है। अल्बानिया की राजधानी तिराना में लगातार आठवें दिन पुलिस और सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। इटली ने हिंसक प्रदर्शनों, तोड़फोड़ और लूटपाट के खिलाफ सख्त कानूनों को मंजूरी दी है। फ्रांस में सप्ताहांत की हिंसा के बाद पेरिस सहित कई शहरों में कर्फ्यू बढ़ा दिया गया है।
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यूरोप के कई देशों में हो रहे प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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यूरोप के कई देशों में महंगाई, बढ़ती ईंधन कीमतों, आवास संकट और सार्वजनिक सेवाओं की बदहाल स्थिति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। अल्बानिया की राजधानी तिराना में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार आठवें दिन भी जारी रहे। इटली में हिंसा और लूटपाट की घटनाओं के बाद सरकार ने सख्त सुरक्षा कानूनों को मंजूरी दी है। वहीं, दक्षिणी इटली में ट्रक चालकों की हड़ताल से सुपरमार्केट और पेट्रोल पंपों पर सामान की किल्लत होने लगी है। फ्रांस के कई शहरों में सप्ताहांत की हिंसा के बाद कर्फ्यू बढ़ा दिया गया है।
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अल्बानिया में आठवें दिन भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प
अल्बानिया की राजधानी तिराना में मंगलवार को पुलिस ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन लगातार आठवें दिन भी हिंसक बना रहा।

प्रदर्शन में हाईस्कूल और विश्वविद्यालयों के छात्र भी शामिल हो गए हैं। वे ट्यूशन फीस कम करने, शिक्षा पर सरकारी निवेश बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही व्यापक सरकार विरोधी आंदोलन के तहत समाजवादी प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग भी उठ रही है।
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अल्बानिया के पीएम ने लगाए गंभीर आरोप
पिछले कई दिनों से प्रदर्शनकारी पुलिस पर पत्थर, आग लगाने वाली बोतलें, फ्लेयर्स और पटाखे फेंक रहे हैं। जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया है। राजधानी के मध्य हिस्से में लगातार झड़पें हो रही हैं। अल्बानिया में यह विरोध कई महीनों से चल रहे प्रदर्शनों के बाद और तेज हुआ है। तथाकथित फ्लेमिंगो आंदोलन ने देश के दक्षिणी तट पर एक बड़े लग्जरी पर्यटन प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए थे। यह परियोजना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर द्वारा स्थापित एक निवेश कंपनी से जुड़ी बताई गई है।

प्रधानमंत्री एदी रामा ने मंगलवार को शिक्षकों और तिराना के स्कूलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद प्रदर्शनकारियों पर हिंसा के जरिए सरकार गिराने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वास्तविक समस्याओं को कुछ लोग जानबूझकर हिंसा फैलाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। रामा ने कहा कि महंगाई, सुरक्षित भविष्य, आवास और बेहतर अवसरों से जुड़ी चिंताएं वास्तविक हैं, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने शहर में आतंक का माहौल बना दिया है। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल कुछ छात्रों को उभरते राजनीतिक चरमपंथी रुझानों से जुड़ा बताया।

इटली में हिंसा के बाद सख्त कानून, दंगाइयों को पांच साल तक की सजा
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने मंगलवार को सुरक्षा से जुड़े कई कड़े उपायों को मंजूरी दी। इनमें प्रदर्शन के दौरान हिंसक गतिविधियों में शामिल होने का नया अपराध, दंगों के लिए सख्त सजा और तोड़फोड़ या लूटपाट में शामिल नाबालिगों के माता-पिता को आर्थिक रूप से जिम्मेदार ठहराने का प्रावधान शामिल है। यह फैसला सप्ताहांत में उत्तरी इटली के कई शहरों में हुई हिंसा के बाद लिया गया। वित्तीय केंद्र मिलान में युवाओं के समूहों ने दुकानों के शीशे तोड़े, लूटपाट की और पुलिस पर हमले किए थे।

मेलोनी ने सोशल मीडिया पर कहा कि तोड़फोड़ और चोरी को विरोध प्रदर्शन नहीं कहा जा सकता, बल्कि ये आपराधिक गतिविधियां हैं। नए नियमों के तहत कम से कम पांच लोगों के समूह में प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने वालों को पांच साल तक की जेल और अधिकतम 20 हजार यूरो का जुर्माना हो सकता है। चेहरा छिपाने या किसी के घायल होने की स्थिति में सजा और बढ़ सकती है।

लूटपाट-तोड़फोड़ में शामिल नाबालिग के माता-पिता होंगे जिम्मेदार
अधिकारियों को नुकसान की भरपाई तत्काल कराने का अधिकार भी दिया गया है। यदि तोड़फोड़ या लूटपाट में नाबालिग शामिल हैं, तो उनके माता-पिता को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकेगा। नए प्रावधानों के तहत पुलिस 14 से 17 वर्ष की उम्र के किशोरों को अपराध किए बिना भी हिरासत में ले सकेगी, बशर्ते उनके खतरनाक होने के पर्याप्त संकेत हों। इससे पहले ऐसी शक्ति केवल वयस्कों के मामले में लागू थी।

सरकार ने शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शनों के दौरान दोबारा हिंसा की आशंका जताई है। मिलान में सुरक्षा मजबूत करने के लिए 2026 के अंत तक पुलिस के साथ 500 सैनिक तैनात किए जाएंगे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सैनिक महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा, संवेदनशील इलाकों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में मदद करेंगे। हालांकि, मेलोनी सरकार के आलोचकों का कहना है कि लगातार सख्त सुरक्षा कानून बनाने से अपराध और अव्यवस्था के मूल कारणों का समाधान नहीं हो रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में इटली की जेलों में कैदियों की संख्या 17 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है।

दक्षिणी इटली में ट्रक चालकों की हड़ताल, सुपरमार्केट में सामान की कमी
इटली में विरोध का एक और मोर्चा ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर खुला है। दक्षिणी शहर नेपल्स में ट्रक चालकों की एक सप्ताह से जारी हड़ताल के कारण कुछ सुपरमार्केट की अलमारियां और पेट्रोल पंप खाली होने लगे हैं। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने नेपल्स के पास सुपरमार्केट के वितरण गोदामों में ताजा खाद्य पदार्थों और अन्य सामान की लोडिंग-अनलोडिंग रोक दी। इसके कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है।

एक सुपरमार्केट ने खाली अलमारियों पर नोटिस लगाकर ग्राहकों से कहा कि हड़ताल के कारण कुछ उत्पाद अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं हो सकते या सीमित मात्रा में मिल सकते हैं। सिसिली में ताजा पास्ता, पैकेटबंद पनीर, मांस और सब्जियों की कमी की खबरें हैं। कुछ जगहों पर ग्राहकों की ओर से जरूरत से ज्यादा सामान जमा करने को भी इसकी एक वजह बताया गया है। कैलाब्रिया और पुगलिया के कुछ इलाकों में भी सुपरमार्केट की अलमारियां आंशिक रूप से खाली होने की खबर है।

फ्रांस के कई शहरों में कर्फ्यू बढ़ाया गया
फ्रांस में सप्ताहांत के दौरान हुई हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट के बाद कई शहरों में कर्फ्यू बढ़ा दिया गया है। पेरिस में स्थानीय अधिकारियों ने लगातार दूसरी रात प्रतिबंध लागू किए। लोगों को तय समय के दौरान सड़कों पर घूमने या सार्वजनिक स्थानों पर रुकने से रोका गया। 

फ्रांस इन्फो के मुताबिक, पेरिस पुलिस प्रीफेक्चर ने मंगलवार रात 11 बजे से बुधवार सुबह छह बजे तक कर्फ्यू का दायरा प्लास द ला रिपब्लिक और लेस हॉल्स इलाके के कुछ हिस्सों तक बढ़ा दिया। सप्ताहांत में फ्रांस में भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और हिंसा हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को सैकड़ों हजार लोग सड़कों पर उतरे थे और देश ने कई वर्षों की सबसे हिंसक अशांति में से एक का सामना किया।

यूरोप में बढ़ती आर्थिक परेशानियां बनीं विरोध की वजह
अल्बानिया, इटली और फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों के पीछे अलग-अलग स्थानीय कारण हैं, लेकिन महंगाई, ईंधन की ऊंची कीमतें, आवास संकट और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर असंतोष कई जगहों पर प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। स्पेन और पुर्तगाल में भी महंगे आवास के खिलाफ विरोध के लिए टेंट कैंप लगाए गए हैं। वहीं, ग्रीस में मंगलवार शाम और बुधवार को रैली तथा विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी।

इटली में ट्रक चालकों की हड़ताल से आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जबकि अल्बानिया में शिक्षा व्यवस्था और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन सरकार विरोधी प्रदर्शन में बदल गया है। फ्रांस में हिंसा के बाद कर्फ्यू और सुरक्षा व्यवस्था सख्त की जा रही है।
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