यूरोपीय देशों में कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए वैक्सीन की कमी इतनी ज्यादा है कि अब यहां के अधिक से अधिक देश अपने राजनीतिक मतभेद भुलाकर रूस से मदद मांग रहे हैं। अब खबर है कि इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्राघी भी रूस में बने वैक्सीन स्पुतनिक वी मंगवाने पर विचार कर रहे हैं। एक वेबसाइट द्वारा खबर में बताया गया है कि अगर यूरोपियन यूनियन (ईयू) अपने सभी सदस्य देशों को जल्द पर्याप्त संख्या में वैक्सीन की सप्लाई नहीं कर पाता, तो कई और देश रूस से सीधे करार करने के लिए तैयार हैं।
इस बात का सबसे साफ संकेत पिछले हफ्ते मिला, जब जर्मनी की चांसलर एंजेला मैर्केल और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बातचीत की। इस वार्ता के बाद क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति के दफ्तर) से जारी बयान में बताया गया कि तीनों राष्ट्रपतियों की बातचीत में पहला मुद्दा स्पुतनिक वी के ईयू में रजिस्ट्रेशन का था। तीनों नेताओं ने इस दौरान वैक्सीन की संभावित आपूर्ति और उसके साझा उत्पादन की संभावनाओं पर भी बातचीत की, लेकिन जर्मन चांसलर की तरफ से जारी से जारी बयान में कहा गया कि रूसी वैक्सीन का इस्तेमाल तभी किया जाएगा, अगर वह यूरोपीय मानकों पर खतरा उतरेगा।
इस उच्च स्तरीय बैठक से यह धारणा और पक्की हुई कि ईयू अपने यहां टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने में फिलहाल अपने को असमर्थ पा रहा है। इस कारण यूरोपीय देश रूस से भी सहायता लेने को तैयार हो रहे हैं, जिसके वह कड़े आलोचक रहे हैं। गौरतलब है कि ईयू के भीतर तीन सबसे बड़े देश जर्मनी, फ्रांस और इटली ही हैं। ध्यान देन की बात है कि जब पिछले साल रूस ने सबसे पहले कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए वैक्सीन बना लेने का ऐलान किया तो यूरोपीय देशों ने उसकी कड़ी आलोचना की थी। तब कहा गया था कि इस वैक्सीन का बिना पूरी जांच के इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है, लेकिन बाद में मशहूर मेडिकल जर्नल लांसेट में छपी रिपोर्ट में इस वैक्सीन को प्रभावी और सुरक्षित बताया गया। उसके बाद अब यूरोप की मेडिकल एजेंसी (ईएमए) उसका परीक्षण कर रही है।
हालांकि, ईएमए की हरी झंडी मिलने के पहले ही हंगरी और स्लोवाकिया ने स्पुतनिक वी को अपने यहां मंजूरी दे दी। ऑस्ट्रिया ने भी इस वैक्सीन के डोज मंगवाने का फैसला कर लिया है। खबरों के मुताबिक इटली फिलहाल यह चाहता है कि रूस इस वैक्सीन के साझा उत्पादन के लिए उससे करार कर ले। इटली में कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर आ गई है। इसलिए वह वैक्सीन पाने की जल्दी में है। जानकारों के मुताबिक अगर साझा उत्पादन का करार जल्द नहीं हुआ, तो इटली सरकार सीधे रूस से इस टीके के आयात का फैसला कर सकती है।
ऑस्ट्रिया सरकार ने स्पुतनिक वी मंगवाने का फैसला करते हुए यूरोपीय आयोग की खुल कर आलोचना भी की। ऑस्ट्रिया के चांसलर सेबेस्टियन कुर्ज ने आरोप लगाया कि यूरोपीय आयोग वैक्सीन का अपने सदस्य देशों के बीच न्यायपूर्ण बंटवारा नहीं कर रहा है। उसके बाद कुर्ज वियना स्थित रूसी राजदूत से मिले। इसके बाद उन्होंने रूसी राजदूत के साथ अपनी मुलाकात की एक तस्वीर ट्वीट करते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि वह जल्द ही वैक्सीन आयात के लिए स्पुतनिक बनाने वाली कंपनी को अपना ऑर्डर भेज देंगे।
ऐसे घटनाक्रमों से रूस विरोधियों को धक्का लगा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि रूस अपनी जनता को वैक्सीन से वंचित रखकर राजनीतिक मकसदों से इसका निर्यात दूसरे देशों को कर रहा है। थिंक टैंक डिफेंस डेमोक्रेसी की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एलिस स्टॉल मेयर ने एक अमेरिकी टीवी चैनल से कहा- ‘हम सभी जानते हैं कि रूस वैक्सीन डिप्लोमेसी कर रहा है। उससे भी ज्यादा खतरनाक बात यह है कि पिछले साल ईएमए की हैकिंग रूसी हैकरों ने ही की थी। अब संभव है कि यही एजेंसी रूस में बने वैक्सीन को हरी झंडी दे दे।’
रूस ने वैक्सीन डिप्लोमेसी जैसी बातों का लगातार खंडन किया है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर वह ऐसी डिप्लोमेसी कर भी रहा है, तो उसे कामयाबी इसलिए ही मिल रही है कि यूरोपीय देश अपने लिए वैक्सीन का पर्याप्त इंतजाम करने में नाकाम रहे हैं। साथ ही उन्हें अमेरिका से भी मदद नहीं मिली, जिस पर खुद वैक्सीन राष्ट्रवाद की नीति पर चलने के आरोप लगे हैं।