चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार को सेना से राजनीतिक निष्ठा मजबूत करने को कहा। यह अपील हाल ही में सेना के शीर्ष अधिकारियों को हटाए जाने के बाद की गई है। वहीं, एक वरिष्ठ जनरल ने रक्षा कर्मियों से जिनपिंग के आदेशों का पूरी तरह पालन करने को कहा है।
संसद में सेना के प्रतिनिधियों से क्या कहा गया?
सरकारी समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' की रिपोर्ट के मुताबिक, जिनपिंग ने चीन की संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और पीपुल्स आर्म्ड पुलिस फोर्स के सैन्य अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस दौरान जिनपिंग ने कहा कि सेना में राजनीतिक निष्ठा को मजबूत करने की विशेष ताकत का पूरा उपयोग किया जाए।
शीर्ष सैन्य अधिकारियों को हटाने के बाद जिनपिंग की पहली बैठक
जनवरी में चीन के दो वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटाए जाने के बाद यह शी जिनपिंग की पहली बैठक है। इनमें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सबसे वरिष्ठ अधिकारी जनरल झांग यौशिया भी शामिल थे। इसे हाल के वर्षों में सेना में सबसे बड़ी कार्रवाई बताया गया, जिससे सैन्य तंत्र में हलचल मच गई थी। झांग यौशिया केंद्रीय सैन्य आयोग के उपाध्यक्ष थे। इस ताकतवर आयोग का नेतृत्व खुद शी जिनपिंग करते हैं। झांग को हटाए जाने के बाद छह सदस्यों वाला केंद्रीय सैन्य आयोग घटकर केवल दो सदस्यों का रह गया है। इनमें शी जिनपिंग और अनुशासन जांच निकाय के सचिव जनरल झांग शेंगमिन शामिल हैं।
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जनरल झांग शेंगमिन ने सेना से क्या अपील की?
मौजूदा संसदीय सत्र में भाषण देते हुए झांग शेंगमिन ने सेना से शी जिनपिंग के आदेशों का दृढ़ता से पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक सुधार को और गहरा किया जाए। कम्युनिस्ट पार्टी के अनुशासन को मजबूत किया जाए। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई तेज की जाए और पार्टी के नेतृत्व के प्रति वफादारी बढ़ाई जाए। झांग ने यह भी कहा कि युद्ध के लिए तैयार रहने वाली प्रशिक्षण व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और विकास के हितों की रक्षा के लिए सेना को तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले विकास को आगे बढ़ाने की जरूरत है। संयुक्त युद्ध क्षमता के निर्माण को तेज किया जाए। नए क्षेत्रों में सैन्य क्षमता के विकास और उसके उपयोग को बढ़ाया जाए और सैन्य प्रशासन को मजबूत किया जाए।
सैन्य प्रतिनिधियों की संख्या क्यों घटाई गई?
खास बात यह रही कि सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष राजनीतिक निकाय से कोई भी सैन्य अधिकारी इस बार संसद के मौजूदा सत्र में शामिल नहीं हुआ। यह सत्र चार मार्च से शुरू हुआ है। संसद की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इस बार संसद के सत्र में शामिल होने वाले सैन्य प्रतिनिधियों की संख्या 281 से घटाकर 243 कर दी गई है। पिछले कुछ वर्षों में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के आरोपों में कई सैन्य अधिकारियों को हटाया गया है। हटाए गए सैन्य अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के अलावा अनुशासनहीनता और कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व की अवहेलना करने के आरोप भी लगाए गए थे।
सेना पर नियंत्रण को लेकर जिनपिंग का रुख क्या है?
2012 में सत्ता में आने के बाद से शी जिनपिंग लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि सेना को कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में ही काम करना चाहिए। आलोचकों का कहना है कि भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के जरिये जिनपिंग ने अपनी ताकत और मजबूत कर ली है। इससे वह पार्टी के संस्थापक माओत्से तुंग के बाद सबसे ताकतवर नेता बनकर उभरे हैं। इन कार्रवाइयों के बावजूद चीन ने गुरुवार को अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी की घोषणा की। इस साल रक्षा बजट करीब 1.91 ट्रिलियन युआन रखा गया है। यह पिछले साल की तुलना में लगभग सात प्रतिशत अधिक है। यह कदम सशस्त्र बलों के तेजी से आधुनिकीकरण के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि सेना को अमेरिकी सैन्य ताकत के बराबर लाया जा सके।
चीन की अर्थव्यवस्था को लेकर क्या संकेत मिले?
चीन ने पिछले कुछ वर्षों से अपनी आर्थिक वृद्धि दर का लक्ष्य लगभग पांच प्रतिशत रखा है। घरेलू और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के कारण यह लक्ष्य तय किया जा रहा है। इस साल पहली बार आर्थिक वृद्धि दर का लक्ष्य घटाकर लगभग साढ़े चार से पांच प्रतिशत के बीच रखा गया है। इसे इस बात के संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।