पश्चिम एशिया में संकट और संघर्ष का माहौल और भी गर्म हो गया है। अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की, तो ईरान ने इसका करारा जवाब देते हुए इस्राइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में सैन्य तनाव और युद्ध का खतरा पैदा कर दिया है। इसी बीच अब इस नाजुक परिस्थिति में फ्रांस ने भी सक्रिय कदम उठाया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने परमाणु चालित विमानवाहक पोत चार्ल्स डे गॉल को बाल्टिक सागर से भूमध्य सागर की ओर तत्काल तैनाती का आदेश दिया।
उनके इस कदम का मकसद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस के मित्र देशों की रक्षा और यूरोपीय हितों की सुरक्षा में मदद करना है। मैक्रों ने कहा कि चार्ल्स डे गॉल अपने एयर विंग (हवाई दस्ते) और उसे सुरक्षा देने वाली फ्रिगेट जहाजों के साथ जाएगी।
क्यों भेजा गया विमानवाहक पोत?
बता दें कि पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में सुरक्षा स्थिति गंभीर हो गई है। सोमवार को साइप्रस में ब्रिटिश वायु सेना के एक सैन्य अड्डे पर हमले की खबरें आईं। साइप्रस यूरोपीय संघ का सदस्य है और फ्रांस ने हाल ही में उसके साथ रणनीतिक साझेदारी भी की है। ऐसे में फ्रांस ने मित्र देशों और यूरोपीय सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चार्ल्स डे गॉल को तैनात करने का फैसला किया।
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मैक्रों का संदेश सख्त, जानिए क्या कहा?
फ्रांस के राष्ट्रपति ने टीवी पर दी गई अपने रिकॉर्डेड संदेश में बताया कि राफेल फाइटर जेट, वायु रक्षा प्रणाली और एयरबोर्न राडार सिस्टम पिछले कुछ घंटों में पश्चिम एशिया में तैनात किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि हम इस प्रयास को तब तक जारी रखेंगे जब तक जरूरत होगी। मैक्रों ने सोमवार को साइप्रस में ब्रिटिश वायु सेना के आधार पर हुए हमले का जिक्र किया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि साइप्रस यूरोपीय संघ का सदस्य है, जिसके साथ फ्रांस ने हाल ही में रणनीतिक साझेदारी की है।
उन्होंने कहा कि इसलिए हमें वहां मदद भेजनी होगी। यही कारण है कि मैंने वहां अतिरिक्त वायु रक्षा उपकरण और फ्रांस का फ्रिगेट लांग्डोक भेजने का फैसला किया है, जो आज शाम साइप्रस के तट पर पहुंचेगा। अपने संदेश में मैक्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि फ्रांस इस प्रयास को तब तक जारी रखेगा जब तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रहे। इसके अलावा फ्रांस का फ्रिगेट जहाज लांग्डोक आज शाम साइप्रस के तट पर पहुंचकर वहां की सुरक्षा में सहयोग करेगा।
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अब समझिए क्या है चार्ल्स डे गॉल की भूमिका?
चार्ल्स डे गॉल परमाणु चालित विमानवाहक पोत है, जिसे फ्रांस की नौसेना का प्रमुख बल माना जाता है। राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि पोत अपने एयर विंग और सुरक्षा के लिए फ्रिगेट जहाजों के साथ भूमध्य सागर की ओर बढ़ेगा। गौरतलब है कि फ्रांस की यह कार्रवाई यूरोप और पश्चिम एशिया में अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों को मजबूत करने की कोशिश है। यह कदम न केवल साइप्रस और यूरोपीय सहयोगियों के प्रति समर्थन का संदेश देता है, बल्कि क्षेत्रीय शक्तियों को भी चेतावनी देता है कि फ्रांस सक्रिय रूप से सुरक्षा में शामिल है।