ख्यात भारतवंशी लेखक वेद मेहता का 86 साल की उम्र में निधन हो गया। तीन वर्ष की उम्र में आंखों की रोशनी गंवाने वाले मेहता ने दृष्टिहीनता को कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। वे 20वीं शताब्दी के मशहूर लेखक के तौर पर चर्चित हुए। उन्होंने अपनी रचनाओं से अमेरिकी लोगों का भारत और भारत के लोगों से परिचय कराया।
‘कॉन्टीनेंट्स ऑफ एक्जाइल’ प्रसिद्ध कृति
उन्होंने अपने आसपास की दुनिया को बड़ी बखूबी और सटीकता से दिखाया। आधुनिक भारत के इतिहास और दृष्टिहीनता की वजह से उनके प्रारंभिक संघर्ष पर आधारित 12 अंकों वाला उनका संस्मरण ‘कॉन्टीनेंट्स ऑफ एक्जाइल’ बहुत प्रसिद्ध हुआ था और उसका पहला अंक ‘डैडीजी’ काफी लोकप्रिय हुआ था। उन्होंने 24 किताबें लिखीं।
‘जीनियस जाइंट’ से सम्मानित
मेहता वर्ष 1982 में मैकआर्थर फाउंडेशन के ‘जीनियस जाइंट’ से सम्मानित हुए थे। मेहता 15 साल की उम्र में अमेरिका आ गए थे और उन्होंने लिट्ल रॉक में अरकंसास स्कूल फॉर द ब्लाइंड में शिक्षा ग्रहण की। पोमोना कॉलेज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से पढ़ने के बाद उन्होंने लेखन पर ध्यान केंद्रित किया।
आवाज सुनकर बताते थे कंपनी का नाम
वेद मेहता की लेखनी में किसी घटना का इतना बेहतरीन चित्रण होता था कि पाठक क्या अन्य लेखक को भी संदेह होता था कि वे अंधे हैं भी या नहीं। अमेरिकी उपन्यासकार नॉर्मन मेलर ने कहा था कि वे मेहता को घूंसा मार कर देखना चाहते हैं कि क्या वे वाकई नहीं देख सकते। हालांकि, बाद में मेलर का संदेह भी दूर हो गया। मेहता के बारे में कहा जाता है कि उनकी सुनने की शक्ति अद्भुत थी। वे किसी कार की आवाज सुनकर बता देते थे कि वह किस कंपनी की है।