मियामी यूनिवर्सिटी के बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग में असिस्टेंट प्रो. अभिषेक प्रसाद ने बताया कि इलेक्ट्रोड और कंप्यूटर से सिगनल्स को दिमाग से रीढ़ की हड्डी और मांशपेशियों तक पहुंचने में 400 मिलीसेकंड का समय लगता है।
सामान्य व्यक्ति में इस प्रक्त्रिस्या को पूरा होने में भी 60 से 120 मिली सेकंड का समय लगता है। प्रो. अभिषेक बताते हैं कि अभी इस प्रक्त्रिस्या को लैपटॉप से अंजाम दिया गया है। जल्द ही इसे मोबाइल से पूरा करने की तैयारी चल रही है।
अभी सिर्फ लैब में प्रक्रिया की है इजाजत
मियामी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने जो कमाल किया है वो सिर्फ लैब में ही संभव है। वे अपने इस शोध को आगे बढ़ाने के लिए सरकार से इजाजत लेना चाहते हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि साल के अंत तक अलदाना इस तकनीक को अपने घर ले जा सकेंगे। इसकी मदद से वे खुद से खाना खाने के साथ दरवाजा खोलने और अन्य सामान्य काम कर सकेंगे।