अमेरिकी मिसाइल हमले में सुलेमानी की मौत से भड़के ईरान ने स्विटजरलैंड के राजदूत को तलब किया है। ईरान में अमेरिका का दूतावात नहीं है। वहां स्विटजरलैंड ही अमेरिका का प्रतिनिधित्व करता है। इसी वजह से ईरान ने उन्हें तलब किया है।
क्या है कुर्द फोर्स और कैसे हैं अमेरिका से संबंध
कुर्द फोर्स ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की एक शाखा है जो देश के बाहर अभियानों को अंजाम देता है। इसका प्रमुख कासिम सुलेमानी सीधे तौर पर देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खमेनेई के प्रति जवाबदेह था। 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में हुए सैन्य हमलों में इराक में सद्दाम हुसैन की सत्ता का अंत हो गया था। इसके बाद मध्यपूर्व में कुर्द सेना ने अपने अभियान तेज कर दिए थे।
कुर्द ने ईरान का समर्थन करने वाले दूसरे देशों के सरकार विरोधी गुटों को हथियार, पैसे और प्रशिक्षण देना शुरू किया। इसके अलावा युद्ध के गैर-पारंपरिक तरीको को अपनाना भी शुरू किया। जिसके कारण ईरान को पारंपरिक हथियारों पर निर्भर रहने वाले विरोधियों पर बढ़त मिली। जिसमें स्वार्म तकनीक (बड़ी सैन्य टुकड़ी के साथ अलग-अलग ठिकानों से लड़ना), ड्रोन का इस्तेमाल करना और साइबर हमले शामिल हैं।
पिछले साल अप्रैल में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फोर्स को विदेशी आतंकवादी संगठन करार दिया था। इस फैसले को लेकर ईरान ने कहा था कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सेना खुद किसी आतंकवादी संगठन से कम नहीं है।
अमेरिका के निशाने पर क्यों हैं कताइब हिज्बुल्ला
अमेरिका का कहना है कि कताइब हिज्बुल्ला इराक में लगातार उसके सैन्य ठिकानों पर हमला करता रहता है। उसने 2009 से इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है। इसके कमांडर अबु महदी अल-मुहांदिस को उसने वैश्विक आतंकी घोषित किया हुआ है।
अमेरिका का कहना है कि इराक की स्थिरता और शांति के लिए यह संगठन खतरा है। अमेरिका के रक्षा विभाग का कहना है कि हिज्बुल्ला का ईरान के इस्लामिक रिवॉल्युशन गार्ड कोर यानी आईआरजीसी के वैश्विक ऑपरेशन आर्म कुर्द फोर्स से संबंध है और उसे ईरान से कई तरह की मदद मिलती है।
वाशिंगटन से जारी अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ‘पेंटागन’ ने कहा है कि वह इराक में उसके दूतावास पर हमले के बाद पश्चिम एशिया में 750 अमेरिकी सैनिक और रवाना कर रहा है। रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने इस कदम को एहतियाती बताते हुए कहा कि नई टुकड़ी में 82वें एयरबोर्न डिवीजन की यूनिट को अगले कुछ दिनों में भेजने की तैयारी है।
इनमें से 500 को रवाना भी कर दिया गया है जबकि 4,000 और सैनिकों को भी जल्द ही रवाना किया जाना है। विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने इराक में हुए हमले को आतंकवादियों की साजिश करार दिया है और इनमें से एक की पहचान अबू महदी अल मुहादिस के रूप में की है। मुहादिस तेहरान समर्थित इराकी सशस्त्र समूहों के शिया नेटवर्क हश्द अल-शाबी का दूसरे नंबर का प्रमुख है।
कतैब हिजबुल्लाह भी इसी का एक हिस्सा है जिसे अमेरिकी हवाई हमलों में निशाना बनाया गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए साल की बधाई देते हुए ईरान को बड़े ही सख्त अंदाज में अपनी धमकी दी है। उन्होंने इराक के अमेरिकी दूतावास पर हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, ‘इराक स्थित अमेरिकी दूतावास की सुरक्षा व्यवस्था कई घंटे पूर्व बहाल की जा चुकी है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के 'यूएसए हिंंदी में' ट्विटर हैंडल पर इरान पर निशाना साधा गया है। इसमें लिखा गया है कि "ईरान के लोग इस बात को समझते हैं कि उनके नेताओं को अपनी हरकतों से बाज आना होगा।''