यहां संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (कॉप-27) के दौरान आए सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के कारण मिस्र सरकार की कड़ी आलोचना हो रही है। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मिस्र सरकार मनमाने ढंग से कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले रही है। ये कार्रवाई मिस्र सरकार के विरोधियों के इस एलान के बाद और तेज हो गई है कि वे 11 नवंबर को राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। अब पुलिस ने राजधानी काहिरा की सड़कों पर जगह- जगह चेक प्वाइंट बना दिए हैं। साथ ही जहां-तहां लोगों को रोक कर उनके फोन की जांच की जा रही है।
गैर-सरकारी संस्था इजिप्शियन कमीशन फॉर राइट्स एंड फ्रीडम्स ने आरोप लगाया है कि पिछले बुधवार के बाद से 93 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार किए गए लोगों में कई वैसे कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील की थी और इसके लिए सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किए थे। पुलिस ने आरोप लगाया है कि सरकार विरोधी कार्रवाइयों में आतंकवादी संगठन भी शामिल हो गए हैं। लेकिन पर्यावरणवादी कार्यकर्ताओं ने इसका खंडन किया है।
भारत से आए जलवायु कार्यकर्ता अजित राजगोपाल को शनिवार को काहिरा में हिरासत में ले लिया गया। राजगोपाल उस पदयात्रा में शामिल थे, जो काहिरा से शरम अल-शेख जा रही थी। शरम अल-शेख में ही रविवार को कॉप-27 (कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज के 27वें अधिवेशन) का उद्घाटन हुआ। खबरों के मुताबिक राजगोपाल को कुछ देर हिरासत में रखने के बाद छोड़ दिया गया। इसके बाद उन्होंने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि अब उनका दोबारा पदयात्रा शुरू करने का इरादा नहीं है।
अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन ने इस बारे में मिस्र के अधिकारियों की राय जानने के लिए उनसे संपर्क किया। लेकिन उऩ्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार किया। मिस्र में 2011 में क्रांति हुई थी, जिससे तत्कालीन सैनिक तानाशाह होश्नी मुबारक को पद छोड़ना पड़ा था। लेकिन कुछ दिन लोकतंत्र का प्रयोग चलने के बाद फिर से सेना ने सत्ता हथिया ली। तब से जनरल अल-सीसी राष्ट्रपति हैं।
सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक मिस्र में आम तौर पर विरोध प्रदर्शनों की इजाजत नहीं मिलती है। इसीलिए सरकार विरोधियों ने यहां हो रहे संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का फायदा उठाने के लिए 11 नवंबर को विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई है।
खबरों के मुताबिक मिस्री मूल के ब्रिटिश कार्यकर्ता अला अब्देलफतह को मिस्र सरकार ने लंबे समय से जेल में रखा हुआ है। इस हफ्ते उन्होंने जेल के अंदर भूख हड़ताल की तीव्रता बढ़ा दी। अब्देलफतह की बहन सना सीफ ने लंदन से सीएनएन को बताया- ‘अला 200 दिन से भूख हड़ताल पर है। वह सिर्फ रोजाना 100 कैलोरी लेकर जिंदा है, जिसे वह द्रव के माध्यम से लेता है।’ कॉप-27 के समय सना लंदन में ब्रिटिश विदेश विभाग के सामने धरने पर बैठी हुई हैं।
मिस्र के सरकार विरोधी समूहों को उम्मीद है कि कॉप-27 से उनके संघर्ष की तरफ दुनिया का ध्यान जाएगा। इस बीच मिस्र सरकार इस मौके पर विदेशों से आए जलवायु कार्यकर्ताओं को भी नहीं बख्श रही है।