पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की खूब कोशिशें की। चाहे फिर बात चीन से मदद लेने की हो, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन करने की हो या फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में इस मुद्दे पर बैठक करवाने की हो। लेकिन अपनी सभी कोशिशों में उसे हार नसीब हुई। शुक्रवार को कश्मीर मामले पर हुई बैठक भी बेनतीजा रही। रूस ने भी भारत का ही समर्थन किया।
पाकिस्तान के लिए चीन ने इस बैठक की सिफारिश की थी। हालांकि बंद कमरे में संयुक्त राष्ट्र की बैठक होने से पहले ही कई देशों ने भारत और पाकिस्तान से द्विपक्षीय बातचीत करने को कहा था। चीन का नेतृत्व उसके संयुक्त राष्ट्र में राजनयिक झांग जुन और पाकिस्तान का नेतृत्व संयुक्त राष्ट्र में उसकी राजदूत मलीहा लोधी ने किया। ये दोनों ही मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब दिए बिना वहां से चले गए।
सूत्रों का कहना है कि ब्रिटेन और पोलैंड जसे देश चाहते थे कि चीन अपनी ओर से कोई बयान दे। लेकिन चीन ने कुछ नहीं कहा। बैठक की जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है, "पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा बेवजह उठाया था। इसका कोई मतलब नहीं था, ना ही कोई नतीजा निकला, ना पोलैंड ने यूएनएससी का अगस्त का चेयरमैन रहते हुए कोई बयान दिया।"
संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजनयिक सैयद अकबरुद्दीन ने अपनी हाजिरजवाबी, तथ्यों और कूटनीतिक जवाबों से पाकिस्तानी पत्रकारों की बोलती बंद कर दी। कश्मीर पर चर्चा के बाद प्रेस कांफ्रेंस चल रही थी जिसमें पाकिस्तान के कई पत्रकार बार-बार अकबरुद्दीन से कश्मीर और मानवाधिकारों को लेकर सवाल पूछ रहे थे।
पाकिस्तानी पत्रकारों ने सवालों के जरिए भारतीय राजनयिक को घेरने की नाकाम कोशिश की। अकबरुद्दीन ने एक-एक करके उनके सभी सवालों के जवाब देकर उन्हें चुप करवा दिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के एक खंड को छोड़कर बाकी सभी खंडों को हटाने का फैसला पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। कश्मीर पर लिए गए फैसले से बाहरी लोगों को कोई मतलब नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, "जेहाद के नाम पर पाकिस्तान हिंसा फैला रहा है। सभी मसले बातचीत से सुलझाए जाएंगे। हिंसा किसी भी मसले का हल नहीं है।"
अकबरुद्दीन ने कहा, "इस मसले पर बातचीत से पहले पाकिस्तान को आतंकवाद फैलाना बंद करना होगा।" उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर फैसला विकास के लिए किया गया है। हम धीरे-धीरे वहां से पाबंदी हटा रहे हैं। अकबरुद्दीन ने कहा कि हम अपनी नीति पर हमेशा की तरह कायम हैं।
चीन यूएनएससी का स्थायी सदस्य है। यूएनएससी की प्रक्रिया के अनुसार परिषद के सदस्य किसी भी मुद्दे पर चर्चा बुला सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि भारत ने विरोधी देशों द्वारा किए जा रहे दावों का तर्कों के साथ जवाब दिया।
भारत ने बैठक में बताया कि जम्मू-कश्मीर को दिए गए विशेष दर्जे के कारण कैसे परेशानियां बढ़ रही थीं। हालांकि भारत ने ये भी कहा कि कश्मीर मुद्दे पर शिमला समझौते के लिए वह प्रतिबद्ध है। सूत्रों ने कहा कि परिषद में अफ्रीकी देशों जैसे, कोटे डी आइवर और इक्वेटोरियल गिनी, डोमिनिकन गणराज्य, जर्मनी, अमेरिका, फ्रांस और रूस ने भारत का समर्थन किया है। वहीं फ्रांस ने भी कहा कि दोनों देशों को इस मुद्दे को द्विपक्षीय बातचीत से हल करना चाहिए।