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कांगो में इबोला का कहर: संक्रमित मरीजों का आंकडा बढ़कर 635 हुआ, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बनी बड़ी चुनौती

Thu, 11 Jun 2026 09:18 AM IST
अमन तिवारी वर्ड डेस्क, अमर उजाला, किन्शासा

सार

कांगो में इबोला के मामले बढ़कर 635 हो गए हैं, जबकि 30 मरीज ठीक हुए हैं। अस्पतालों में सुविधाओं की कमी, खराब सड़कें और सुरक्षा चुनौतियां बचाव कार्य में बाधा बन रही हैं। प्रशासन अब निगरानी और जागरूकता पर जोर दे रहा है। 
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इबोला का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
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डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य मंत्री रोजर कांबा ने जानकारी दी है कि नौ जून तक देश में इबोला के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 635 हो गई है। यह बीमारी 'बुंडीबुग्यो इबोला वायरस' के कारण फैली है। हालांकि, इस संकट के बीच राहत की खबर यह है कि अब तक 30 मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं। हाल ही में आठ नए मरीज ठीक हुए हैं, जिनमें से सात इतुरी प्रांत के न्यानकुंडे और एक मोंगबवालू इलाके से है।
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स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा?
स्वास्थ्य मंत्री ने सोशल मीडिया पर बताया कि सरकार इस बीमारी को रोकने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि मरीजों के संपर्क में आए लोगों की पहचान करने का काम अब पहले से बेहतर हो रहा है। अब 61.1 प्रतिशत संपर्कों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। सरकार ने इतुरी, उत्तर कीवू और दक्षिण कीवू जैसे प्रभावित प्रांतों में 490 टन दवाइयां भेजी हैं। वहां प्रयोगशालाओं को मजबूत किया गया है और स्वास्थ्य टीमें दिन-रात काम कर रही हैं। मंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज के लिए आएं, क्योंकि समय पर देखभाल से जान बचाई जा सकती है।

स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बन रही चुनौती
दूसरी ओर, अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) ने जमीनी हकीकत पर चिंता जताई है। एजेंसी का कहना है कि बचाव कार्यों में कई बड़ी बाधाएं आ रही हैं। प्रभावित इलाकों के अस्पतालों की हालत बहुत खराब है। वहां पीने के साफ पानी, कचरा जलाने वाली मशीनों, पीपीई किट और सफाई के सामान की भारी कमी है। इसके अलावा, खराब सड़कें, एम्बुलेंस की कमी और सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं भी काम को धीमा कर रही हैं। कई स्वास्थ्य कर्मियों को समय पर वेतन नहीं मिला है, जिससे उन पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है।
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एक बड़ी चुनौती स्थानीय लोगों के बीच भरोसे की कमी भी है। इसके अलावा, कुछ देशों ने प्रभावित अफ्रीकी देशों की यात्रा पर पाबंदियां लगा दी हैं, जिसे स्वास्थ्य एजेंसियों ने गलत बताया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 17 मई को ही इस प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया था। अब प्रशासन का पूरा ध्यान लोगों को जागरूक करने, सुरक्षित तरीके से अंतिम संस्कार करने और निगरानी बढ़ाने पर है।
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