अमेरिका के वाशिंगटन विश्वविद्यालय के भूकंप वैज्ञानिकों के मुताबिक अगली बड़ी दरार इस सदी के अंत तक ही फटेगी। आफ्टरशॉक्स का सिलसिला जारी है।
'खतरा अभी टला नहीं' इस पहलू को रेखांकित करते हुए वैज्ञानिकों ने कहा, समुद्रतटीय इलाकों में दहशत है। आफ्टरशॉक्स से पेसिफिक रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में समुद्री लहरें अब भी रुक-रुक कर रौद्र रूप धारण कर रही हैं। रिंग ऑफ फायर एक विशाल टेक्टोनिक बेल्ट है जो दक्षिण अमेरिकी तटों से उत्तरी अमेरिका, जापान, फिलीपीन, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड व रूस के कामचटका तक फैला है।
वैज्ञानिकों ने भारत के किन इलाकों को आगाह किया?
अगस्त-सितंबर 2025 में कामचटका में भूकंप के बाद अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों ने इसे मेगाक्वेक बताते हुए कहा कि ये आपदा भारत के लिए भी गंभीर सबक है। वैज्ञानिकों के मुताबिक रूस के सुदूर-पूर्वी कामचटका प्रायद्वीप के तट पर आए 8.8 तीव्रता के भूकंप ने न केवल पृथ्वी की परतों को चीरा, बल्कि
वैज्ञानिकों की भविष्यवाणियां भी झकझोर दीं। नेशनल ज्योग्राफिक के रॉबिन जॉर्ज एंड्रयूज की रिपोर्ट के अनुसार, 2011 की फुकुशिमा आपदा के बाद यह सबसे बड़ा भूकंप है, जिसने समुद्र तल को तोड़ विशाल ऊर्जा महाविस्फोट किया।
- भारत में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह सुनामी व भूकंप के लिए उच्च जोखिम वाले क्षेत्र माने जाते हैं।
- अंडमान-निकोबार सबडक्शन जोन : मेगाथ्रस्ट भूकंप और सुनामी के लिहाज से सबसे संवेदनशील।
- पूर्वी तट तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल 2004 की तरह पुनः सुनामी की चपेट में आ सकते हैं।
- हिमालयन फॉल्ट लाइन : उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, कश्मीर और असम में बड़े भूकंपों की संभावना बनी रहती है।
साल 2023 में तुर्किये से नेपाल तक भूकंप की त्रासदी देखी गई थी। नवंबर में पश्चिमी नेपाल में आए भयंकर भूकंप से सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी। इस आपदा में कई लोग घायल भी हुए। नेपाली अधिकारियों ने रुकुम पश्चिम और जाजरकोट जिले को मिलाकर 120 से अधिक मौतों की पुष्टि की थी। जाजरकोट काठमांडू से लगभग 500 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। इस त्रासदी से पहले साल 2010 में हैती में सुनामी के साथ आए भूकंप के बाद करीब 8000 मिलियन रुपये का नुकसान का अनुमान लगाया गया था। दिसंबर 2004 में इंडोनेशिया में लाखों लोगों की जानें गईं थीं। इस आपदा में 10000 मिलियन रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया था। साल 2008 में चीन में आए भूकंप से 87600 से अधिक लोगों की मौत हुई और 86000 मिलियन रुपये का नुकसान हुआ।
भारत और पाकिस्तान में भूकंप से कितनी आर्थिक क्षति?
साल 2005 में पाकिस्तान में 6.7 तीव्रता के भूकंप ने 7621 लोगों की जान गई थी। इससे 6680 मिलियन रुपये का नुकसान हुआ। भारत में साल 2001 में गुजरात के कच्छ और भुज के भूकंप में 2623 मिलियन रुपये का नुकसान हुआ था।
अफ्रीकी देश मोरक्को में 8 सितंबर 2023 की रात किसी कयामत से कम नहीं रही। 6.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप में समाचार एजेंसी एएफपी ने 2000 से अधिक मौतों की बात कही थी। इससे पहले जापान में 11 मार्च 2011 को 9.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप में 15000 से अधिक लोगों की जान गई थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक झटकों की तीव्रता इतनी थी कि धरती अपनी धुरी को 4 से 10 इंच तक खिसक गई थी। दरअसल, जापान पैसिफिक रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में आता है, जो भूकंप के लिए अत्यधिक संवेदनशील है। यह क्षेत्र 40000 किलोमीटर में फैला है और दुनिया के 90 फीसदी भूकंप यहीं आते हैं। इसमें 75 फीसदी सक्रिय ज्वालामुखी भी हैं, और 15 देश इसकी जद में हैं।
अफगानिस्तान के पूर्वी इलाके में सितंबर 2025 में आए विनाशकारी भूकंप में 1400 से अधिक मौत हुई थी। ये भूकंप कुनार प्रांत के शहरों और पड़ोसी नंगरहार प्रांत के जलालाबाद शहर में आया। इससे भारी नुकसान हुआ और इसके बाद भी इलाके में कई झटके आए। अफगानिस्तान की भौगोलिक स्थिति के कारण यहां लगातार भूकंप आते रहते हैं क्योंकि यहां सक्रिय प्लेटों का अक्सर टकराव होता है।
क्वेटा में आए भूकंप ने 60 हजार लोगों की जान ले ली थी
ये बात 31 मई 1935 की है। तब भारत का विभाजन नहीं हुआ था। उस दौरान बलूचिस्तान के क्वेटा शहर में आए भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। इसकी तीव्रता 7.7 मापी गई थी। इस दौरान करीब 60 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दो लाख से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। भूकंप के चलते तीन लाख से ज्यादा मकान जमींदोज हो गए थे।
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