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सीआईएसए सम्मेलन: भारत के अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन फ्रेमवर्क पर 74 देशों ने किया हस्ताक्षर

Sat, 15 Jun 2019 02:22 PM IST
Nilesh Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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External Affairs Minister S. Jaishankar - फोटो : ANI
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विदेश मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल चुके विदेश मंत्री एस जयशंकर भूटान के बाद अपनी दूसरी विदेश यात्रा पर तजाकिस्तान में हैं। तजाकिस्तान की राजधानी दुशांबे में हो रहे पांचवें सीआइसीए सम्मेलन में विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की हमारी पहल पर हमें विश्व भर से भारी समर्थन मिल रहा है। 74 देशों ने आज फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जाना है। 

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सम्मेलन के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तजाकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान से मुलाकात की। इससे पहले शुक्रवार को उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमन और बहरीन के विदेश मंत्री खालिद बिन अहमद अल-खलीफा से भी मुलाकात की थी।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन क्या है?

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) में 121 देश शामिल हैं। इनमे से लगभग 80 फीसदी वे देश हैं जो कर्क और मकर रेखा के बीच स्थित हैं। यानी कि ये देश सूर्य से सबसे कम दूरी पर स्थित हैं और इन देशों में सालों भर बहुत अधिक मात्रा में सौर ऊर्जा उपलब्ध रहती है। आईएसए का लक्ष्य 2030 तक एक ट्रिलियन वाट (1000 गीगावाट) सौर ऊर्जा उत्पादन का है। 

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क्या है सीआइसीए सम्मेलन, भारत कब बना सदस्य?

सीआइसीए, एशिया में शांति, सुरक्षा और स्थिरता में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक एशियाई मंच है। पांचवें सीआइसीए शिखर सम्मेलन का इस बार का थीम 'सुरक्षित और अधिक समृद्ध क्षेत्र के लिए साझा दृष्टिकोण' है।

भारत सीआइसीए के स्थापना काल से ही इसका सदस्य है। दिवंगत भाजपा नेता और पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसकी स्थापना के समय साल 2002 में अल्माटी में आयोजित पहले सीआईसीए शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। सीआईसीए के तहत भारत इसकी विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता करता रहा है। 
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