नेपाल में बढ़े राजनीतिक दबाव के कारण शेर बहादुर देउबा सरकार को मई में स्थानीय चुनाव कराने पर राजी होना पड़ा है। कई दिनों तक चली खींचतान के बाद आखिरकार निर्वाचन आयोग और सरकारी अधिकारियों के बीच अगले 18 मई को स्थानीय चुनाव कराने पर सहमति बनी है। इसके पहले प्रधानमंत्री देउबा पर चुनाव टलवाने के लिए सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों का भारी दबाव था। लेकिन राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी के हस्तक्षेप और निर्वाचन आयोग के समय पर चुनाव कराने पर अडिग रहने की वजह से देउबा अपने गठबंधन सहयोगियों की मंशा पूरी नहीं कर पाए।
मंगलवार को निर्वाचन आयोग और सरकारी अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश थपलिया ने कहा- ‘असल में सरकारी अधिकारियों के साथ 18 मई को स्थानीय चुनाव कराने के बारे में पहले हमारी अनौपचारिक बातचीत हुई थी। अब इस तारीख पर औपचारिक सहमति बन गई है।’ थपलिया ने बताया कि इस तारीख का औपचारिक एलान प्रधानमंत्री देउबा अपनी कैबिनेट की बैठक के बाद करेंगे।
सत्ताधारी गठबंधन में शामिल नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) और नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूनिफाइड सोशलिस्ट) स्थानीय चुनावों को कम से कम आठ महीने टालने के लिए दबाव बनाए हुए थीं। पुष्प कमल दहल और माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व वाली ये पार्टियां चाहती थीं कि स्थानीय चुनाव राष्ट्रीय चुनाव के बाद हों। लेकिन चुनाव टालने के लिए संबंधित कानून में संशोधन करना पड़ता। पिछले हफ्ते खबर आई थी कि इसके लिए प्रधानमंत्री देउबा राजी हो गए हैं। उसके बाद ही राष्ट्रपति भंडारी ने समय पर चुनाव कराने की सलाह दी। उधर सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक में निर्वाचन आयोग ने दो टूक कहा कि कानून में संशोधन की कोई जरूरत नहीं है। स्थानीय चुनाव 19 मई से पहले कराए जा सकते हैं।
नेपाली अखबारों में छपी खबरों के मुताबिक राष्ट्रपति के हस्तक्षेप के बाद प्रधानमंत्री ने स्थानीय चुनावों को ना टालने का मन बना लिया था। सोमवार को उन्होंने नेपाली कांग्रेस की बागमती प्रांतीय इकाई के नए पदाधिकारियों की बैठक में इस बात का संकेत दे दिया। नेपाली कांग्रेस की बागमती प्रांतीय इकाई के महासचिव राजू श्रेष्ठ ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी। उनके मुताबिक देउबा ने कहा था कि वे कुछ दिनों के अंदर ही मई में चुनाव कराने की घोषणा कर देंगे।