अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमले के बाद अमेरिका कड़ा जवाब देगा। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन ईरान पर बड़े पैमाने पर जवाबी हमला करेगा। फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने ईरान के हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हम उन्हें बहुत खतरनाक तरह से जवाब देंगे।" उन्होंने कहा, "हम उन पर जोरदार हमला करेंगे। उन्हें इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।"
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने अमेरिकी ठिकानों की ओर दागी गई सभी बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक लिया। उन्होंने कहा कि सैनिकों के पास जवाबी कार्रवाई के लिए केवल कुछ मिनट का समय था। फॉक्स न्यूज के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी बलों ने वास्तविक समय में अभियान चलाकर क्षेत्र की रक्षा की। इस दौरान सैन्यकर्मी लगातार निर्देश साझा कर रहे थे, ताकि मिसाइलें अपने लक्ष्य तक न पहुंच सकें।
आईआरजीसी ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे और सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) सुविधा को निशाना बनाने की जिम्मेदारी ली है। ईरान के सरकारी प्रसारक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) के अनुसार, आईआरजीसी की एयरोस्पेस फोर्स ने कहा कि उसने जॉर्डन में अमेरिकी सेना के एयरबेस और सेंट्रल कमांड केंद्र पर "कई बैलिस्टिक मिसाइलें" दागीं।
संगठन ने इसे अमेरिका की कथित आक्रामक कार्रवाइयों के जवाब में उठाया गया कदम बताया। आईआरजीसी के बयान में कहा गया, "जब तक ईरान के खिलाफ धमकियां जारी रहेंगी और अमेरिकी सेना हमारे हितों के खिलाफ गैरकानूनी तथा दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करती रहेगी, तब तक प्रतिरोध भी जारी रहेगा।" बयान में यह भी कहा गया कि अमेरिका को ईरान के हितों के खिलाफ कथित गैरकानूनी हस्तक्षेप और धमकियां बंद करनी चाहिए।
अमेरिका ने इराक में ईरान समर्थित लड़ाकों पर किया हमला
ट्रंप ने इराक में ईरान समर्थित लड़ाकों के ठिकानों पर अमेरिका और सऊदी अरब की ओर से रात में किए गए हमलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान इराक सरकार के साथ समन्वय में चलाया गया। ट्रंप ने ईरान समर्थित समूहों को "दुनिया के लिए कैंसर" बताया और संकेत दिया कि क्षेत्र में ईरान से जुड़े अन्य समूहों के खिलाफ भी आगे कार्रवाई की जा सकती है।
इससे पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने एक बयान में कहा था कि सऊदी अरब की सशस्त्र सेनाओं और सेंटकॉम ने संयुक्त रूप से इराक में ईरान समर्थित लड़ाकों के ठिकानों पर सटीक हमले किए। इन हमलों में रसद और हथियार संचालन से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
हमलों पर क्या बोली अमेरिकी सेना?
सेंटकॉम ने कहा कि 28 जुलाई को किए गए ये हमले उन समूहों के खिलाफ थे, जिन्हें उसने ईरान समर्थित आतंकवादी संगठन बताया। सेंटकॉम का दावा है कि आईआरजीसी ने इन समूहों को अमेरिकी बलों और सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे पर हमले करने के निर्देश दिए थे।
सेंटकॉम ने कहा, "पिछले 72 घंटों में आईआरजीसी के निर्देश पर हुए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में अमेरिका और सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने पूर्वी इराक में आतंकवादी संगठनों के कई रसद और हथियार ठिकानों को निशाना बनाया।" अमेरिकी सेना ने दावा किया कि हाल में अमेरिकी बलों पर किए गए ड्रोन हमले सफल नहीं रहे।