अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर पनामा नहर और चीन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पनामा नहर का नियंत्रण सौंपकर बड़ी गलती की थी और अब चीन इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका ऐसा हरगिज नहीं होने देगा। उन्होंने यह बयान नॉर्थ डकोटा में थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन समारोह के दौरान दिया। इस दौरान उन्होंने जन्मसिद्ध नागरिकता और राष्ट्रपति की शक्तियों पर भी अपनी राय रखी।
ट्रंप ने कहा कि जब अमेरिका ने पनामा नहर का नियंत्रण पनामा को सौंपा तो उसके बाद वहां से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क कई गुना बढ़ा दिया गया। उनके अनुसार, इससे पनामा को भारी आर्थिक फायदा हुआ। ट्रंप ने दावा किया कि अब चीन इस अहम समुद्री मार्ग पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने रणनीतिक हितों से जुड़ा यह मुद्दा किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं करेगा।
पनामा नहर को लेकर चीन पर क्यों साधा निशाना?
- ट्रंप ने कहा कि पनामा नहर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।
- उनका दावा है कि चीन इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
- ट्रंप ने कहा कि अमेरिका चीन को पनामा नहर पर नियंत्रण या प्रभाव स्थापित नहीं करने देगा।
- उन्होंने पनामा नहर का नियंत्रण पनामा को सौंपने के पुराने फैसले को गलत बताया।
- ट्रंप के अनुसार, नियंत्रण मिलने के बाद पनामा ने जहाजों से वसूले जाने वाले ट्रांजिट शुल्क में कई बार बढ़ोतरी की।
- उन्होंने कहा कि इससे अमेरिका के हितों को नुकसान हुआ और पनामा को आर्थिक फायदा मिला।
- ट्रंप ने दोहराया कि उनकी सरकार की प्राथमिकता अमेरिका के रणनीतिक और आर्थिक हितों की रक्षा करना है।
पनामा नहर का मामला आखिर क्या है? आसान भाषा में समझिए
पनामा नहर एक कृत्रिम जलमार्ग है, जो अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ता है। इससे जहाजों को पूरे दक्षिण अमेरिका का लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ता और हजारों किलोमीटर की दूरी बच जाती है।
- यह इतना महत्वपूर्ण क्यों?
दुनिया के व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इससे समय, ईंधन और परिवहन लागत कम होती है। इसलिए इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है।
चीन की कंपनियां पनामा नहर के दोनों ओर स्थित दो बड़े बंदरगाहों का संचालन करती हैं। अमेरिका को डर है कि इससे चीन इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अपना प्रभाव बढ़ा सकता है।
दोनों महासागरों के जलस्तर में थोड़ा अंतर है। इसलिए पनामा नहर में लॉक यानी बड़े जलद्वार बने हैं। ये पानी को भरकर या निकालकर जहाजों को ऊपर-नीचे उठाते और उतारते हैं। इसी व्यवस्था की मदद से जहाज एक महासागर से दूसरे महासागर तक पहुंचते हैं।
पहले इसका नियंत्रण किसके पास था?
- वर्ष 1914 में पनामा नहर बनकर तैयार हुई।
- शुरुआत में इसका नियंत्रण अमेरिका के पास था।
- 1979 में अमेरिका और पनामा ने मिलकर इसका संचालन शुरू किया।
- 1999 में इसका पूरा नियंत्रण पनामा को सौंप दिया गया।
जन्मसिद्ध नागरिकता पर ट्रंप ने क्या कहा?
अपने संबोधन में ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता के मुद्दे पर भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार इस विषय पर अदालत का फैसला सही नहीं था। ट्रंप ने दावा किया कि जन्मसिद्ध नागरिकता का प्रावधान मूल रूप से गृहयुद्ध के बाद गुलामों के बच्चों के लिए बनाया गया था। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस मुद्दे पर आगे भी कानूनी और राजनीतिक स्तर पर प्रयास जारी रहेंगे।
राष्ट्रपति की शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को क्यों बताया अहम?
ट्रंप ने हाल में आए सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे राष्ट्रपति के अधिकारों को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद ऐसा फैसला आया है, जिसने राष्ट्रपति पद की संवैधानिक शक्तियों को फिर से स्पष्ट किया है। ट्रंप के अनुसार, मजबूत नेतृत्व के लिए राष्ट्रपति के पास पर्याप्त अधिकार होना जरूरी है और यह फैसला उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।