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Iran: ईरान के साथ शांति वार्ता चाहते हैं ट्रंप, संघर्ष विराम के लिए अमेरिका ने रखी छह शर्तें

Mon, 23 Mar 2026 03:32 AM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

सूत्रों ने बताया कि हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच कोई सीधा संपर्क नहीं हुआ है। लेकिन मिस्र, कतर और ब्रिटेन ने दोनों देशों के बीच संदेशों को आदान-प्रदान किया है। ईरान ने बातचीत में दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन कुछ बहुत कठोर शर्तों के साथ।
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Donald Trump - फोटो : ANI
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ युद्ध में बुरी तरह फंस गए लगते हैं। साथियों के साथ छोड़ने और घरेलू मोर्चे पर घिरने के बाद वह इससे निकलने के लिए सम्मानजनक रास्ता तलाश रहे हैं। उनकी टीम ईरान के साथ संभावित शांति वार्ता के लिए रणनीति बनाने में जुटी है।
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अमेरिकी अधिकारी और सूत्रों के अनुसार, तीन सप्ताह के युद्ध के बाद ट्रंप प्रशासन ने अगले चरण पर प्रारंभिक चर्चा शुरू कर दी है। इस पर भी विचार-विमर्श चल रहा है कि ईरान के साथ शांति वार्ता किस स्वरूप में हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप के दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ संभावित कूटनीति पर चर्चा में शामिल हैं।

ईरान ने भी दिखाई बातचीत में दिलचस्पी
सूत्रों ने बताया कि हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच कोई सीधा संपर्क नहीं हुआ है। लेकिन मिस्र, कतर और ब्रिटेन ने दोनों देशों के बीच संदेशों को आदान-प्रदान किया है। ईरान ने बातचीत में दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन कुछ बहुत कठोर शर्तों के साथ। ईरान की मांगों में युद्धविराम, भविष्य में ईरान पर हमला नहीं होने की गारंटी और मुआवजा शामिल है।
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ईरान के लिए अमेरिका की छह शर्तें 
शांति वार्ता और संघर्ष विराम के लिए अमेरिका ने भी ईरान के लिए छह शर्तें रखी हैं। पांच वर्षों तक वह कोई मिसाइल कार्यक्रम नहीं शुरू करेगा। यूरेनियम का संवर्धन पूरी तरह से बंद कर देगा। अपने नतांज, इस्फहान और फोर्डो परमाणु संयंत्रों को पूरी तरह निष्क्रिय कर देगा। परमाणु हथियार कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में सहायक सेंट्रीफ्यूज और संबंधित मशीनरी के निर्माण और उपयोग पर सख्त बाहरी निगरानी प्रोटोकॉल का पालन करेगा। क्षेत्रीय देशों के साथ शस्त्र नियंत्रण संधियां करेगा, जिनमें मिसाइलों की संख्या 1,000 से अधिक न होना शामिल हो और हिजबुल्ला, हूती और गाजा में हमास जैसे छद्म संगठनों को किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं देना शामिल है। 

ब्रिटेन ने पश्चिम एशिया संघर्ष से किया किनारा
ब्रिटेन के आवास, समुदाय और स्थानीय सरकार मामलों के राज्य मंत्री स्टीव रीड ने कहा कि ब्रिटेन पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ संघर्ष में शामिल नहीं होगा। लेकिन, वह अपने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
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