राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शरणार्थियों के लिए अमेरिका के दरवाजे बंद कर दिए हैं। अमेरिकी सीमा पर शरण के लिए आने वाले लोगों को अब अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल पा रहा है। या तो उन्हें उनके देश वापस भेज दिया जा रहा है या फिर सीधे हिरासत में। ये सब ट्रंप द्वारा निलंबित की गई शरण प्रणाली के चलते हो रहा है।
दुनिया के कई देशों जैसे- इरिट्रिया, ग्वाटेमाला, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, घाना, उज्बेकिस्तान सहित अन्य से अप्रवासी अमेरिकी सीमा पर शरण मांगने के लिए पहुंचते हैं। इन लोगों को अपने धर्म, लैंगिक पहचान या राजनेताओं का समर्थन करने के लिए अपने देश में डर और अत्याचार का सामना करना पड़ता है। पीढ़ियों से, ऐसे लोगों को अमेरिकी अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने का मौका दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
शपथ ग्रहण के तुरंत बाद ट्रंप ने निलंबित की शरण प्रणाली
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी 2025 को अपने दूसरे कार्यकाल की शपथ ली, जिसके तुरंत बात उन्होंने अवैध आव्रजन पर व्यापक कार्रवाई की और शरण प्रणाली को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही अमेरिका में घुसपैठ को रोकने के लिए कई और सख्त आदेश जारी किए।
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बदलती हुई स्थिति का सामना कर रहे अप्रवासी
वकीलों, कार्यकर्ताओं और अप्रवासियों के अनुसार, अब शरण चाहने वालों को एक अजीब और बदलती हुई स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। कुछ लोगों को मामूली पूछताछ के बाद उन देशों में वापस भेज दिया जाता है जिन्हें वे शायद जानते भी नहीं। और कुछ लोगों को आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन की हिरासत में रखा जा रहा है।
ट्रंप के सत्ता में आने के बाद शरण से जुड़ी कॉल्स हुई कम: वकील
सीमा पर काम करने वाले वकीलों का कहना है कि ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से शरण से जुड़ी कॉल्स बहुत कम हो गई हैं। उन्होंने संदेह जताया है कि अब सीमा पार करने वाले अप्रवासियों को शरण पाने का मौका नहीं दिया जा रहा। उन्हें या तो तुरंत निष्कासित कर दिया जा रहा है या फिर हिरासत में लिया जा रहा है। ग्लोबल स्ट्रेटेजिक लिटिगेशन काउंसिल की निदेशक बेला मोसेलमैन्स ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि यह किसी के लिए भी पूरी तरह से स्पष्ट है कि जब लोग आते हैं और शरण मांगते हैं तो क्या होता है।'
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प्रतिबंधों को अदालत में दी गई है चुनौती
अप्रवासियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को अदालत में चुनौती दी गई है। सरकार के खिलाफ कई मुकदमे दायर किए गए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि नए नियम उन अप्रवासियों का भविष्य खतरे में डाल रहे हैं, जो अपने देश में उत्पीड़न के चलते भाग रहे हैं। सरकार का कहना है कि यह एक 'राजनीतिक मामला' है और अदालत इसमें दखल नहीं दे सकती, लेकिन अमेरिका की नागरिक स्वतंत्रता संस्था और अन्य संगठनों ने इसे अदालत में 'गैरकानूनी और अभूतपूर्व' बताया है।
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