नव निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन के लिए तमाम कांटे बोने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही इस बार हार मान ली है लेकिन अगली बार (2024) के लिए फिर से ट्रंप सरकार का एजेंडा सेट कर दिया है। पूर्व विदेश सचिव शशांक और कूटनीति के जानकार पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में नई परंपरा ही शुरू कर दी है। दुनिया के परिपक्व माने जाने वाले लोकतंत्र में ऐसा होने का बिल्कुल अनुमान नहीं था। एक राष्ट्रपति अपने देश की चुनाव परंपरा को नहीं मान रहा है और नव निर्वाचित राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण की तारीख में 14 दिन से कम बचे हैं, लेकिन ट्रंप लगातार बाइडन के चुनाव हारने के दावे करते रहे।
नटवर सिंह का कहना है कि रिपब्लिकन की फॉलोइंग ट्रंप की ताकत है। यह जबरदस्त तरीके से बनी हुई है। एक भी रिपब्लिकन ट्रंप को छोड़कर नहीं गया। कुछ रिपब्लिकन नेता दिखावे के लिए इस्तीफा दे रहे हैं। मुझे लग रहा है कि बाद में इनमें भी जो भी ट्रंप के खिलाफ जाएगा, उसे ठीक कर देंगे। पूर्व विदेश सचिव शशांक का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप के चार साल के कामकाज में उन्होंने बेटी-दामाद सबको सरकार से जोड़ा, सलाहकार बनाया। हर साल वह अपने एडवाइजर बदलते, लोगों को सरकार से बाहर का रास्ता दिखाते रहे।
ट्रंप ने पुलिस वाले बर्ताव से अमेरिका में ब्लैक एंड व्हाइट के बीच में खाई को बढ़ाकर अपनी फॉलोइंग बढ़ाई और 48-49 फीसदी वोट हासिल किए। नटवर सिंह कहते हैं कि ट्रंप को समझने की कोशिश कीजिए। 2016 में राष्ट्रपति बनने से पहले ट्रंप के पास कोई राजनीतिक कार्यालय नहीं था। वह केवल बिजनेसमैन थे। 2016 में रिपब्लिकन पार्टी से चुनाव लड़कर राष्ट्रपति हो गए और अब वह नई रिपब्लिकन पार्टी की अवधारणा खड़ी कर रहे हैं। यह उनका बाइडन की भावी सरकार पर दबाव बनाने, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए एजेंडा सेट करना है।
20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण समारोह है। पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन नेता जार्ज बुश इसमें शामिल होंगे। उन्होंने घोषणा भी कर दी है, लेकिन ट्रंप को लेकर अमेरिका से भारत तक के कूटनीतिक जानकारों में संशय बरकरार है। कुंवर नटवर सिंह और शशांक कहते हैं कि अभी तक वहां परंपरा रही है कि राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में सभी पूर्व राष्ट्रपति, अमेरिका के दोनों सदनों के नए-पुराने सदस्य, रिपब्लिकन, डेमोक्रेट नेता सभी शरीक होते हैं, लेकिन ट्रंप के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। राष्ट्रपति ट्रंप कब अपने ही बयान से पलट जाएं, कहा नहीं जा सकता। हां, यदि वह शामिल नहीं हुए तो यह भी एक नई परंपरा होगी। यह भी एक एतिहासिक घटना ही होगी।
पूर्व विदेश सचिव शशांक का कहना है कि चाहे अमेरिका की घरेलू नीति हो या विदेश नीति। सुरक्षा का मामला हो या अंतरराष्ट्रीय व्यापार। ट्रंप ने हर जगह परंपरा से हटकर अपने हिसाब से काम किया है। वह नव निर्वाचित राष्ट्रपति बाइडन को अभी अमेरिका में अपनी मजबूती का अहसास करा रहे हैं। मुझे लग रहा है कि 20 जनवरी के बाद बाइडन द्वारा उठाए जाने वाले कदमों में इसका असर दिखाई देगा। इतना ही नहीं अगला राष्ट्रपति चुनाव (2024) भी इससे प्रभावित होगा। ट्रंप का असर दिखाई देगा।
नटवर सिंह का कहना है कि यह सवाल दिलचस्प है। इसमें अमेरिका के नए राष्ट्रवाद की परिभाषा में आ रहे लोग हैं। छात्र, बेरोजगार हैं। अमेरिकी समाजवाद पर नई सोच रखने वाले लोग भी हैं। शशांक कहते हैं कि यह अभी भले ही अभूतपूर्व लग रहा हो, लेकिन रिपब्लिकन पार्टी के हित में ही है। इसलिए लोगों में ट्रंप की पकड़ बनेगी। कल हुए प्रदर्शन से भी लग रहा है कि ट्रंप का समर्थन है। दोनों तरफ से मार्च चल रहा है। गांव के लोग, बेरोजगार सभी वर्ग के लोग ट्रंप के साथ नज़र आ रहे हैं।