अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद अहम खर्ग आईलैंड को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर खर्ग आईलैंड पर जोरदार धमाकों वाला एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि द्वीप को 'टुकड़े-टुकड़े' किया जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि ‘खर्ग आईलैंड के टुकड़े-टुकड़े किए जा रहे हैं।’ हालांकि, उन्होंने इसके अलावा हमले को लेकर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। ट्रंप के पोस्ट में दिखाई गई तस्वीरों में खर्ग आईलैंड पर बड़े धमाके होते नजर आ रहे हैं। हालांकि, इस वीडियो की वास्तविकता को लेकर भी सवाल उठे हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप द्वारा साझा किया गया वीडियो संभवतः सिंथेटिक यानी AI से तैयार किया गया हो सकता है। AI से बदली गई तस्वीरों और वीडियो की पहचान करने वाले सॉफ्टवेयर के विश्लेषण में इसके कृत्रिम रूप से तैयार किए जाने की संभावना सामने आई। व्हाइट हाउस और अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से खर्ग आईलैंड पर हमले की तत्काल कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई थी। ऐसे में ट्रंप के दावे और वीडियो को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
खर्ग से पहले अमेरिका ने ईरान के लारक आईलैंड पर हमला किया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस कार्रवाई में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के दो सैन्य लॉन्च सिस्टम को निशाना बनाया गया। अमेरिकी पक्ष का दावा था कि IRGC इन लॉन्च सिस्टम की मदद से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री माइंस बिछाने की तैयारी कर रहा था। ईरानी मीडिया की रिपोर्टों में दावा किया गया कि लारक पर ड्रोन से हमला हुआ और इसमें कुछ ईरानी सैनिकों तथा नागरिकों के मारे जाने या घायल होने की खबर सामने आई।
लारक पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया। ईरान के IRGC के मुताबिक, जॉर्डन और कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। ईरानी पक्ष ने जॉर्डन के किंग हुसैन और अल-अजराक एयरबेस की तकनीकी सुविधाओं और लड़ाकू विमानों से जुड़ी जगहों को निशाना बनाने का दावा किया। वहीं, जॉर्डन की ओर से कई मिसाइलों को अपनी वायु रक्षा प्रणाली से रोकने की बात कही गई।
खर्ग आईलैंड पर अमेरिकी हमले के ट्रंप के दावे से संकेत मिल रहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। दूसरी ओर, ईरान पहले ही अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी मिसाइल हमलों का दावा कर चुका है। अगर दोनों देशों के बीच हमले और जवाबी हमले का सिलसिला आगे बढ़ता है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। खासकर तेल आपूर्ति, होर्मुज स्ट्रेट और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।