विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सरकार बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रहा है, जो भारत के हितों के अनुकूल है। उन्होंने कहा कि दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते की आवश्यकता है। जयशंकर बुधवार शाम चैथम हाउस थिंक टैंक में 'भारत का उदय और दुनिया में भूमिका' विषय पर आयोजित सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध, ब्रिक्स के सदस्य देशों की दिशा और चीन के साथ संबंधों जैसे प्रमुख विदेश नीति के मुद्दों पर चर्चा की।
उन्होंने कहा, हम उन कुछ देशों में से एक हैं, जो विभिन्न स्तरों पर नियमित रूप से मॉस्को और कीव से बात कर रहे हैं। जहां भी भारत कुछ कर सकता है, हम हमेशा खुले विचारों वाले रहे हैं। हमारी स्थायी स्थिति यह रही है कि उन्हें सीधे बातचीत करनी चाहिए।
जयशंकर से नए अमेरिकी प्रशासन के पहले कुछ हफ्तों और विशेष रूप से ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ के बारे में पूछा गया। उन्होंने कहा, हम एक राष्ट्रपति और एक ऐसे प्रशासन को देख रहे हैं,जो हमारी भाषा में बहुपक्षीयता की ओर बढ़ रहा है और यह भारत के अनुकूल है। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप के दृष्टिकोण से हमारे पास एक बड़ा साझा उद्यम क्वाड है, जहां हर कोई अपनी उचित हिस्सेदारी का भुगतान करता है। इसमें कोई मुफ्त सवारी नहीं है। यह एक अच्छा मॉडल है जो काम करता है। क्वाड में अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं।
ट्रंप के टैरिफ के एलान पर विदेश मंत्री ने क्या कहा
टैरिफ के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल अभी वॉशिंगटन में हैं। पिछले महीने व्हाइट हाउस में प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा, हमने इस पर (टैरिफ) खुली बातचीत की है और उस बातचीत का परिणाम यह है कि हमने द्विपक्षीय व्यापार समझौते की आवश्यकता पर सहमति जताई है।
'एफटीए एक जटिल प्रक्रिया, समय लगना स्वाभाविक'
चैथम हाउस के निदेशक ब्रॉनवेन मैडॉक्स के साथ बातचीत के दौरान जयशंकर ने भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते को लेकर कहा कि वह (एफटीए) पर मंत्री स्तरीय चर्चाओं को लेकर आशावादी हैं। उन्होंने कहा, यह एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया है। इसलिए जटिलता को देखते हुए यह स्वाभाविक है कि इसमें समय लगेगा। प्रधानमंत्री (कीर स्टार्मर), विदेश मंत्री डेविड लैमी और व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स के साथ मेरी चर्चाओं से मुझे एक संदेश मिला कि ब्रिटेन भी आगे बढ़ना चाहता है। मेरे पास संबंधित सहयोगियों की ओर से कुछ बिंदु थे। इसलिए मैं आशावादी हूं और उम्मीद करता हूं कि इसमें अधिक समय नहीं लगेगा।
चीन के साथ संबंधों में प्रगति पर क्या बोले जयशंकर
विदेश मंत्री ने चीन के साथ संबंधों में प्रगति का भी जिक्र किया, जिसमें तिब्बत में माउंट कैलाश तीर्थयात्रा मार्ग का शुभारंभ शामिल हैं। उन्होंने कहा, हमारे पास चीन के साथ एक बहुत ही अनूठा संबंध है, क्योंकि दुनिया में केवल दो ही देश हैं, जिनकी आबादी एक अरब से अधिक है। हम एक ऐसा संबंध चाहते हैं, जहां हमारे हितों का सम्मान किया जाए, संवेदनशीलता को पहचाना जाए और दोनों के लिए काम करे।
'पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर का इंतजार'
कश्मीर को लेकर विदेश मंत्री ने कहा, कश्मीर में हमने अधिकांश मुद्दों को सुलझाने के लिए अच्छा काम किया है। अनुच्छेद 370 को हटाना पहला कदम था। कश्मीर में विकास और आर्थिक गतिविधि व सामाजिक न्याय को बहाल करना दूसरा कदम था और बहुत अधिक मतदान के साथ चुनाव कराना तीसरा कदम था। मुझे लगता है कि हम कश्मीर के जिस हिस्से का इंतजार कर रहा हैं, वह पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है। जब वह हो जाएगा, तो मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि कश्मीर का मुद्दा सुलझ जाएगा। जयशंकर छह दिवसीय ब्रिटेन और आयरलैंड के दौरे पर हैं।
संबंधित वीडियो-