अमेरिकी सीनेट से पास रूस प्रतिबंध विधेयक भारत पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। ट्रंप ने इसमें ईरान पर भी टैरिफ की शर्त जोड़ने को कहा है, जिससे बिल पर नया विवाद खड़ा हो गया है। अगर यह कानून बनता है, तो भारत-अमेरिका के आर्थिक और कूटनीतिक रिश्तों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संसद में पारित हुए रूस प्रतिबंध विधेयक पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी सीनेट से मंजूरी पाने वाला यह विधेयक भारत सहित पांच देशों पर 100% तक सीमा शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रावधान रखता है। ट्रंप ने इस बिल में संशोधन का सुझाव देते हुए कहा कि राष्ट्रपति को केवल प्रतिबंध लगाने ही नहीं, बल्कि ईरान पर भी टैरिफ लगाने का व्यापक अधिकार दिया जाना चाहिए।
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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया यह बिल अगर पूरी तरह कानून बन जाता है, तो भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में नया तनाव पैदा हो सकता है।
मामले से जुड़ी पांच बड़ी बातें
ट्रंप की नई शर्त: अमेरिकी राष्ट्रपति ने विधेयक में ईरान पर भी भारी टैरिफ लगाने का अधिकार शामिल करने की मांग रखी।
100% टैरिफ का डर: बिल के तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों (भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान) पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।
भारत की स्थिति: चीन के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है।
संसद में गतिरोध: सीनेट में 86-12 से वोट मिलने के बावजूद डेमोक्रेट्स ट्रंप को टैरिफ का असीमित अधिकार देने का विरोध कर रहे हैं।
व्यापारिक वार्ताओं पर असर: नए कानून से भारत-अमेरिका के बीच जारी प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं।
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क्या अटक जाएगा नया कानून?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, 'ईमानदारी से कहूं तो इसकी जरूरत नहीं होनी चाहिए। लेकिन अगर यह जरूरी है, तो मैं चाहता हूं कि वे इसमें सिर्फ प्रतिबंधों तक सीमित न रहें, बल्कि ईरान पर टैरिफ लगाने का प्रावधान भी जोड़ें। दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम भी यही चाहते थे।'
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस रुख से विधेयक का हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचले सदन) में पास होना मुश्किल हो सकता है। डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेता राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने के असीमित अधिकार देने का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे अमेरिका में आयात शुल्क बढ़ जाएगा, जिससे आम नागरिकों पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा।
भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या पड़ेगा असर?
अमेरिका ने अगस्त 2025 में भी भारत द्वारा रूसी ऊर्जा खरीद पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जिससे कुल शुल्क बढ़कर 50% हो गया था। हालांकि, फरवरी में अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया था। तब अमेरिका ने भारत को छूट दी थी, जिसके बाद जून 2026 में भारत का रूसी तेल आयात रिकॉर्ड 34% बढ़कर €4.5 अरब तक पहुंच गया था। अब यदि यह नया प्रतिबंध विधेयक लागू होता है, तो दोनों देशों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को बड़ा झटका लग सकता है, जिसमें भारतीय निर्यात पर शुल्क घटाकर 18% करने की बातचीत चल रही है।