ट्रंप ने अपने पत्र में कंपनियों से दवा उत्पादों में मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) की कीमतों को शामिल करने, नई दवाओं के लिए ऐसी कीमतों की गारंटी देने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी दवा कंपनियां विदेशों से जो अतिरिक्त राजस्व अर्जित कर रही हैं उन्हें अब अमेरिकी मरीजों के लिए खर्च करें।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 17 प्रमुख दवा कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को पत्र भेजकर अमेरिकियों के लिए दवाओं की कीमतें कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है। ट्रंप ने एली लिली, सनोफी, रेजेनरॉन, मर्क एंड कंपनी, जॉनसन एंड जॉनसन और एस्ट्राजेनेका सहित अन्य कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों को पत्र भेजे हैं। इनकी प्रतियां ट्रंप के सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई हैं।
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व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, हालिया आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी नागरिक ब्रांडेड दवाओं के लिए जो कीमतें चुका रहे हैं, वह अमेरिका के ही समान विकसित अन्य देशों में चुकाई जाने वाली कीमतों से तीन गुना अधिक है। ट्रंप प्रशासन दुर्व्यवहारपूर्ण दवा मूल्य निर्धारण प्रथाओं को समाप्त करने के लिए अपने पास मौजूद हर उपाय का इस्तेमाल करेगा।
ट्रंप ने अपने पत्र में कंपनियों से दवा उत्पादों में मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) की कीमतों को शामिल करने, नई दवाओं के लिए ऐसी कीमतों की गारंटी देने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी दवा कंपनियां विदेशों से जो अतिरिक्त राजस्व अर्जित कर रही हैं उन्हें अब अमेरिकी मरीजों के लिए खर्च करें। ट्रंप ने सभी सीईओ को दवाओं के मूल्य में कमी की बाध्यकारी प्रतिबद्धता जताते हुए 29 सितंबर तक पत्र का जवाब भेजने के लिए कहा है।
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भारत से आने वाली दवाएं महंगी होने को देखते हुए उठाया कदम
ट्रंप के लिए यह कदम उठाना इसलिए जरूरी हो गया है कि भारत पर उन्होंने जिस 25 फीसदी टैरिफ की घोषणा की है उसका सबसे अधिक असर फार्मा कंपनियों पर पड़ने जा रहा है। भारत अमेरिकी नागरिकों की दवा की 47 फीसदी जरूरत पूरी करता है। जाहिर है टैरिफ से दवाएं तत्काल महंगी हो जाएंगी। इससे आम जनता में ट्रंप प्रशासन को लेकर नाराजगी बढ़ेगी। इस लिए ट्रंप पहले ही एहतियाती कदम उठा रहे हैं।