सार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सर्जियो गोर को भारत में अमेरिका का नया राजदूत और दक्षिण-एशिया विशेष दूत नियुक्त किया। शपथ ग्रहण के दौरान ट्रंप ने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण साझेदार बताया और कहा कि पहले के व्यापारिक समझौते असमान थे, लेकिन अब न्यायपूर्ण और सभी के लिए फायदेमंद सौदा बनने के करीब हैं।
सर्जियो गोर के शपथ ग्रहण समारोह में डोनाल्ड ट्रंप
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अमेरिका की ट्रंप प्रशासन ने सोमवार को सर्जियो गोर को भारत में अमेरिका के नए राजदूत और दक्षिण-एशिया विशेष दूत नियुक्त किया और फिर शपथ दिलाई। इस दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी वहां मौजूद थे, जिन्होंने गोर के शपथ ग्रहण के दौरान भारत को अमेरिका के एक अहम साझेदार बताया। साथ ही उन्होंने भारत के साथ एक नए व्यापार समझौते की भी बात कही। ट्रंप ने कहा कि पहले हमारे व्यापारिक सौदे बहुत ही असमान थे, लेकिन अब एक न्यायपूर्ण और सभी के लिए फायदेमंद समझौता बनने के करीब हैं।
भारत पुरानी सभ्यताओं का देश- ट्रंप
व्हाइट हाउस में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में ट्रंप ने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है, सबसे बड़ा देश है और यहां 1.5 अरब से ज्यादा लोग रहते हैं। हमारे प्रधानमंत्री मोदी के साथ हमारे संबंध शानदार हैं और सर्जियो गोर ने इसे और मजबूत किया है।
इस दौरान ट्रंप ने इस बात पर भी जोर दिया कि गोर का काम अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करना होगा। उन्होंने बताया कि गोर निवेश बढ़ाने, अमेरिकी ऊर्जा निर्यात को बढ़ाने और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने में मदद करेंगे।
सर्जियो गोर का शपथ ग्रहण
बता दें कि शपथ ग्रहण समारोह में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, एटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी और कई सांसद मौजूद थे। सर्जियो गोर ने शपथ लेने के बाद कहा कि मैं अमेरिका और भारत के संबंधों को और मजबूत करने के लिए पूरी मेहनत करूंगा। साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को भी धन्यवाद कहा।
सर्जियो गोर ने नामांकन के बाद की थी पीएम मोदी से मुलाकात
गौरतलब है कि गोर ने अगस्त में अमेरिका द्वारा भारत के लिए राजदूत और दक्षिण-एशिया विशेष दूत के रूप में नामांकन किया गया था। इससे पहले अक्तूबर में उन्होंने भारत का दौरा कर प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर और एनएसए अजित डोवाल से मुलाकात की थी। यह शपथ ग्रहण अमेरिका और भारत के सामरिक और आर्थिक सहयोग को और मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।