अमेरिका में संसद भवन पर हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके कार्यकाल से पहले हटाने की मांग तेज हो गई है। अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत राष्ट्रपति को हटाने का प्रावधान है, लेकिन इसके लिए पहल खुद उनके मंत्रिमंडल को करनी होगी। साथ ही उस प्रस्ताव को सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव दोनों सदनों की मंजूरी मिलनी होगी। हाउस की स्पीकर डेमोक्रेटिक पार्टी की नैंसी पेलोसी ने उप-राष्ट्रपति माइक पेंस और ट्रंप के मंत्रिमंडल से कहा है कि वे तुरंत अनुच्छेद 25 के तहत ट्रंप को हटाने की प्रक्रिया शुरू करें।
पेलोसी ने धमकी दी है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो वे सदन में महाभियोग प्रस्ताव लाकर ट्रंप को इस विधि से हटाने की प्रक्रिया शुरू करेंगी। हाउस में डेमोक्रेटिक सदस्य इलहान उमर ने सदन के उन सदस्यों की सदस्यता रद्द करने का प्रस्ताव पेश करने का एलान किया है, जिन्होंने राष्ट्रपति के रूप में जो बाइडन के निर्वाचन पर एतराज जताया था। उमर का कहना है कि ऐसा करके ये सदस्य भी कैपिटल हिल (संसद भवन) पर हमले में सहभागी बने।
लेकिन कई विश्लेषकों का मानना है कि ये कोशिशें अमेरिकी समाज में विभाजन को और तीखा बनाएंगी। बुधवार की घटना के बाद ट्रंप मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों ने इस्तीफे दिए हैं। कई सांसदों ने उनसे अपने को अलग कर लिया है। लेकिन रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों और समर्थकों के बीच ट्रंप की जबरदस्त लोकप्रियता बनी हुई है। गुरुवार को जारी एक ताजा सर्वे के मुताबिक 80 फीसदी रिपब्लिकन ट्रंप को समय से पहले उनके पद से हटाने के खिलाफ हैं। इसे देखते हुए रिपब्लिकन पार्टी ट्रंप से पूरी तरह नाता तोड़कर उन्हें हटाने की कोशिश में शामिल होगी, इसकी संभावना कम ही मानी जा रही है।
वेबसाइट एक्सियोस.कॉम के लिए इप्सोस एजेंसी की तरफ से किए गए इस सर्वे के नतीजों के आधार पर विश्लेषकों ने कहा है कि रिपब्लिकन पार्टी असल में ट्रंप की पार्टी बन चुकी है। इसलिए जो नेता उनसे अपने को अलग कर रहे हैं, मुमकिन है कि उनका राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ जाए। ये सर्वे बुधवार की घटना के तुरंत बाद किया गया।
सर्वे से यह जरूर सामने आया कि रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों के बीच आम राय कैपिटल हिल पर हमले के खिलाफ है। इस घटना के बाद ट्रंप के हार स्वीकार ना करने के रुख को समर्थन देने को लेकर उनका उत्साह भी घटा है। संभवतया यही वजह है कि ट्रंप ने इस घटना के बाद 20 जनवरी को जो बाइडन को व्यवस्थित ढंग से सत्ता सौंपने का एलान कर दिया है। फिर भी यह नहीं लगता कि रिपब्लिकन समर्थक बुधवार की घटना से बहुत परेशान हैं।
सर्वे एजेंसी इस्पोस पब्लिक अफेयर्स के उपाध्यक्ष क्रिस जैकसन ने सर्वे नतीजों का विश्लेषण करते हुए कहा कि हालांकि सिर्फ छह फीसदी रिपब्लिकन समर्थकों ने संसद भवन पर कब्जे की कोशिश का समर्थन किया, लेकिन उनके बीच आम राय बनी हुई है कि अगले चार साल तक व्हाइट हाउस में ट्रंप को ही रहना चाहिए। उनकी राय है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जो बाइडन चुनाव वैध ढंग से नहीं जीते हैं, इसलिए उनका राष्ट्रपति बनना अनुचित होगा।
सर्वे से यह सामने भी आया कि हालांकि सिर्फ छह फीसदी रिपब्लिकन समर्थकों ने बुधवार की घटना से सहमति जताई, लेकिन उनके बीच साठ फीसदी लोगों ने कहा कि अगर निर्वाचित नेता देश की रक्षा नहीं करते हैं, तो आम लोगों को सामने आने की जरूरत है। इसे बुधवार को वॉशिंगटन में जुटी उपद्रवी भीड़ को रिपब्लिकन बहुमत के परोक्ष समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
देश में जारी गहरे मतभेद की ही यह मिसाल है कि इस सर्वे में जहां सिर्फ 22 फीसदी रिपब्लिकन समर्थकों ने बुधवार की घटना को तख्ता-पलट की कोशिश माना, वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी के 74 प्रतिशत समर्थकों ने घटना को इस रूप में देखा। डेमोक्रेट समर्थकों के बीच 86 फीसदी लोगों ने कहा कि ट्रंप को फौरन राष्ट्रपति पद से हटा दिया जाना चाहिए।
जानकारों का कहना है कि अमेरिका के अंदर, खासकर ट्रंप समर्थकों के बीच इस बात को लेकर कोई चिंता नहीं है कि दुनिया में इस महाशक्ति की छवि लगातार खराब हो रही है। बुधवार की घटना और अमेरिकी समाज में चौड़ी होती इस खाई से उसके विरोधी देशों को कटाक्ष करने का मौका मिला।
चीन ने हांगकांग में पिछले साल सिटी काउंसिल में घुसने की प्रदर्शनकारियों की कोशिश की याद दिलाते हुए कहा है कि अब अमेरिकी मीडिया अपने यहां हुई वैसी ही घटना को आतंकवाद कह रहा है। वेनेजुएला ने कहा है कि अमेरिका अपने विरोधी देशों में ऐसी गतिवधियां करने वाले समूहों को समर्थन देता रहा है। अब उसे अब खुद अपनी ही दवा का स्वाद चखना पड़ रहा है।
पिछले जुलाई में पिउ रिसर्च के सर्वे में सामने आया था कि अमेरिका सहयोगी देशों में सिर्फ 34 फीसदी लोग अमेरिका के बारे में अच्छी राय रखते हैं। अब अंदेशा है कि अमेरिका के बारे में अच्छी राय रखने वाले लोगों की संख्या और घट जाएगी। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि ऐसा नहीं लगता कि ट्रंप समर्थकों और बड़ी संख्या में दूसरे अमेरिकियों को इस बात की चिंता है। यह देश के लिए एक चिंताजनक पहलू है।