अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल की कीमतों में गिरावट का दावा किया है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमत करीब 10 डॉलर प्रति बैरल कम हुई है। इसकी वजह ईरान के साथ सैन्य टकराव दोबारा शुरू नहीं होने और दोनों देशों के बीच संभावित समझौते की उम्मीद है। ट्रंप ने कहा कि ईरान जल्द से जल्द समझौता करना चाहता है और बातचीत से इसका रास्ता निकल सकता है।
ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "तेल की कीमतें तेजी से गिर रही हैं। प्रति बैरल करीब 10 डॉलर की गिरावट आई है, जो एक रिकॉर्ड है। लोगों को लग रहा है कि ईरान के साथ युद्ध नहीं होगा। ईरान जल्द से जल्द समझौता चाहता है। ऐसा हो सकता है।"
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान के साथ बातचीत के जरिए समझौता होने की उम्मीद जताई। फॉक्स न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और वह दोनों संभावित समझौते की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है और प्रशासन आगे भी प्रयास जारी रखेगा।
ईरान बोला- कूटनीति और सैन्य टकराव, दोनों के लिए तैयार
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश पहले से कहीं ज्यादा कूटनीति और सैन्य टकराव, दोनों के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि अब यह अमेरिका पर निर्भर करता है कि वह बातचीत का रास्ता चुनता है या फिर सैन्य कार्रवाई की ओर बढ़ता है।
तुर्कमेनिस्तान की यात्रा पूरी करने के बाद सोमवार को ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRNA से बातचीत में अराघची ने कहा कि ईरान ने कूटनीतिक समाधान के लिए अपनी शर्तें और प्रस्तावित योजना पेश कर दी है। उन्होंने बताया कि कतर और पाकिस्तान फोन कॉल तथा दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने के प्रयासों के जरिए समझौते की कोशिशों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
अराघची ने अमेरिका को दी क्या चेतावनी?
अराघची ने चेतावनी दी कि अगर दोबारा सैन्य कार्रवाई की गई या धोखा देने की कोशिश हुई तो ईरान पहले से कहीं ज्यादा कड़ी प्रतिक्रिया देगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान ने अपने हथियारों को आधुनिक बनाया है, सैन्य कमजोरियों को दूर किया है और नए हथियारों का परीक्षण किया है। उनके मुताबिक, ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी कहा कि बातचीत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अमेरिका की है। उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करने की मांग दोहराई। बघाई ने कहा कि ईरान की मांगें स्पष्ट हैं और अब गेंद अमेरिका के पाले में है।
ट्रंप बोले- ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे
ट्रंप ने इससे पहले ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा था कि अमेरिका ने तेहरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए हस्तक्षेप किया। रविवार को आयोवा में एक रैली के दौरान उन्होंने संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए चुकाई गई छोटी कीमत बताया था।
वहीं, एक्सियोस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप से 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर फिर से सैन्य हमले करने पर विचार करने को कहा है। हालांकि, ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह फिलहाल बातचीत जारी रखने के पक्ष में हैं, लेकिन सैन्य विकल्प भी खुले रखेंगे।
ट्रंप का दावा- अमेरिका दुनिया में तेल और गैस का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता
मध्यावधि चुनाव से पहले अपने अंतिम चुनावी प्रचार भाषण में ट्रंप ने अमेरिका की ऊर्जा उत्पादन क्षमता को भी अपनी सरकार की उपलब्धि बताया। वॉशिंगटन डीसी में लिंकन मेमोरियल रिफ्लेक्टिंग पूल के दोबारा उद्घाटन के दौरान उन्होंने दावा किया कि अमेरिका दुनिया में तेल और प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है।
ट्रंप ने अपनी 'ड्रिल, बेबी, ड्रिल' नीति का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका और वेनेजुएला के पास मिलकर दुनिया के करीब 50 फीसदी तेल भंडार हैं। उन्होंने दावा किया कि इन दोनों देशों के पास सऊदी अरब और रूस के संयुक्त भंडार से भी कहीं ज्यादा तेल है। ट्रंप ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में वेनेजुएला और ग्रीनलैंड के संसाधनों तक अमेरिका की पहुंच को भी अहम बताया।