ईरान पर हमले को ट्रंप ने बताया जरूरी कदम
ट्रंप ने ईरान पर हमलों को सही ठहराते हुए कहा कि तेहरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका के लिए बढ़ता खतरा बन गया था। व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि यह हमला 'खौफनाक खतरे को खत्म करने का आखिरी और सबसे बेहतर मौका' था। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक समर्थन उनके साथ मौजूद था।
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : व्हाइट हाउस/आधिकारिक वेबसाइट/वीडियो ग्रैब
पूर्व राष्ट्रपति ओबामा के फैसले की आलोचना की
ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए हुए समझौते के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा को जिम्मेदार ठहराया। यह समझौता ओबामा प्रशासन के दौरान किया गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, मुझे इस बात पर बहुत गर्व है कि मैंने राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा की ओर से किए गए ईरान परमाणु समझौते को खत्म कर दिया।
ट्रंप ने उस समझौते को बहुत ही खराब, खतरनाक दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा, अगर वह समझौता चलता रहता, तो ईरान के पास तीन साल पहले ही परमाणु हथियार होते और वह उनका इस्तेमाल भी कर चुका होता। ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने ऐसा नहीं होने दिया। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान साल 2018 में अमेरिका को इस परमाणु समझौते से अलग कर दिया था।
चार हफ्ते से ज्यादा तक जारी रह सकता है युद्ध: ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ जारी युद्ध चार हफ्तों से ज्यादा समय तक जारी रह सकता है। उन्होंने कहा, अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका इस सैन्य अभियान को और लंबे समय तक जारी रखने के लिए तैयार है। रविवार को डेली मेल को दिए इंटरव्यू में भी ट्रंप ने जिक्र किया था कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चार या पांच हफ्तों तक चल सकता है। उन्होंने आगे कहा कि अगर युद्ध लंबा चला तो वह इससे ऊबेंगे नहीं औऱ अमेरिका पूरी मजबूती से आगे बढ़ेगा।
ईरान को लेकर सख्त रुख दिखाते हुए ट्रंप ने कहा, आप इन लोगों से समझौता नहीं कर सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने दो बार समझौतों से पीछे हटकर भरोसा तोड़ा। पहले ऐसा लगा कि समझौता हो गया है। लेकिन बाद में ईरान पीछे हट गया। फिर दोबारा बातचीत हुई और एक बार फिर ईरान ने कदम वापस खींच लिए।