20 जनवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ग्रहण करने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार दिए इंटरव्यू में पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन की खुब आलोचना की। उन्होंने बाइडन द्वारा अपने परिवार और अधिकारियों को क्षमादान देने पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें भी अपने पहले कार्यकाल के अंत में खुद को क्षमादान देने का विकल्प दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे नकारते हुए कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया।
इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि ओवल ऑफिस में वापसी के बाद कैसा महसूस हुआ, तो उन्होंने कहा कि यह बहुत काम था, लेकिन उन्हें लगता था कि वहां नहीं रहना चाहिए था। साथ ही 2020 चुनाव में धोखाधड़ी के अपने दावों को दोहराते हुए ट्रंप ने कहा कि यदि वह जीतते, तो देश की स्थिति बेहतर होती। उन्होंने कहा कि अमेरिकी समस्याओं का समाधान संभव है, बस समय, प्रयास और धन की जरूरत है।
2020 के चुनाव की दोहराई दलील
2020 के चुनावों के बारे में अपनी दलील को फिर से दोहराते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर वह चुनाव जीत जाते, तो कई समस्याएं जैसे मुद्रास्फीति, अफ़गानिस्तान की आपदा, इस्राइल में मारे गए लोग और यूक्रेन युद्ध जैसी घटनाएं नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान संभव है, लेकिन इसके लिए समय, प्रयास और धन की जरूरत है। अगर वे अगले चुनाव में नहीं जीतते, तो उन्हें यकीन है कि देश हमेशा के लिए खो जाएगा।
अवैध अप्रवास के मुद्दे पर भी बोले ट्रंप
इसके साथ ही अवैध अप्रवास के मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह अभयारण्य शहरों को संघीय निधि से वंचित कर सकते हैं, जो अप्रवास कानून को लागू करने में मदद नहीं करते। उन्होंने कहा कि कुछ समुदायों में इन शहरों को खत्म करने की मांग है। साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने आगे 6 जनवरी, 2021 को कैपिटल दंगाइयों के लगभग 1,500 लोगों को माफ़ी दिए जाने का भी बचाव किया। इसको लेकर उन्होंने कहा कि इस दंगे को लेकर दोषी करार लोगों में ज़्यादातर लोग बिल्कुल निर्दोष थे।
टिकटॉक के मुद्दें पर भी बोले ट्रंप
अमेरिका में बाइडन प्रशासन के दौरान टिकटॉक मुद्दे की बढ़ती गंभीरता को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत की। उन्होंने कहा कि चीन में बनी चीजों के बारे में लोग बहुत कुछ नहीं कहते, जबकि टिकटॉक को लेकर सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा-चढ़ा कर बताया जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि युवा लोग टिकटॉक पर पागलपन भरे वीडियो देखते हैं, तो चीन के लिए उनकी जासूसी क्यों जरूरी होगी?