अमेरिका के लोगों- खासकर निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन की टीम ने शुक्रवार सुबह (भारतीय समय के अनुसार) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान से राहत सांस ली। ट्रंप ने यह साफ कर दिया कि 14 दिसंबर को इलेक्टोरल कॉलेज के मतदान में अगर वे हार गए तो वे ह्वाइट हाउस छोड़ देंगे। लेकिन उन्होंने यह भी कहा- हार मानना बहुत मुश्किल फैसला होगा, क्योंकि हम जानते हैं कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है।
उन्होंने कहा- “हम इसे समय पर साबित कर पाएंगे या नहीं, यह अहम सवाल है, क्योंकि समय हमारे पक्ष में नहीं है। बाकी सब कुछ हमारे पक्ष में है। तथ्य हमारे पक्ष में हैं- बहुत बड़ी धोखाधड़ी हुई है।” जाहिर है, अपने समर्थकों में असंतोष और नए राष्ट्रपति के प्रति अविश्वास कायम रखने की अपनी रणनीति छोड़ने का उन्होंने कोई संकेत नहीं दिया है।
इसलिए ट्रंप के इस बयान से सिर्फ ये आशंका दूर हुई है कि अगले 20 जनवरी को अमेरिका में कोई अभूतपूर्व राजनीतिक संकट खड़ा हो सकता है। अब यह तय है कि बाइडन उस रोज राष्ट्रपति पद संभालेंगे। लेकिन रिपब्लिकन समर्थकों का असंतोष वे दूर कर पाएंगे, इसकी संभावना फिलहाल कम दिख रही है।
इस बीच कोरोना महामारी और आर्थिक संकट के बारे में मिली ताजा खबरें अमेरिका और जो बाइडन की टीम की चिंता बढ़ाने वाली हैं। गुरुवार को अमेरिका के अस्पतालों में भर्ती होने वाले कोरोना मरीजों की संख्या अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। यह रिकॉर्ड लगातार 17वें दिन टूटा। गुरुवार को 90,481 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगले दो हफ्तों में रोज अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में दोगुनी बढ़ोतरी हो सकती है। जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जोनाथन रेनर ने टीवी चैनल सीएनएन से कहा कि आज जो लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं, मुमकिन है कि उन्हें दो हफ्ते पहले संक्रमण हुआ हो। संक्रमण होने के बाद लक्षण उभरने में पांच से सात दिन का वक्त लगता है। मरीज की हालत अस्पताल में भर्ती कराने लायक हो, ऐसा होने में औसतन एक हफ्ता और लग जाता है। जिन मरीजों की हालत बहुत बिगड़ जाती है, उनकी मृत्यु होने में एक सप्ताह और लगता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में थैंक्स गिविंग समारोह में जिस तरह लोग शामिल हुए, उसे देखते हुए आशंका है कि बहुत से लोग संक्रमित हुए होंगे। संभव है कि अगले दो हफ्तों में उनमें से बहुत से लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़े।
कोरोना वायरस संक्रमण की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नए सिरे से जोरदार झटका लगने का अंदेशा भी अब बढ़ गया है। अर्थशास्त्रियों ने कहा कि हालांकि सबको जनवरी में जारी होने वाले आर्थिक आंकड़ों का इंतजार है, लेकिन अभी जो स्थिति दिख रही है, वह अंधकारमय लगती है। वेल्स फारगो इन्वेस्टमेंट इंस्टीट्यूट के ग्लोबल स्ट्रेटेजिस्ट गैरी स्कलोसबर्ग ने टीवी चैनल एनबीसी से कहा- देश के आर्थिक विकास की स्थिति (पिछली तिमाही में) अच्छी थी, लेकिन अब हम उसमें दरार पड़ती देख रहे हैं।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में बेरोजगारी भत्ता मांगने वाले लोगों की संख्या पिछले हफ्ते 7,78,000 तक पहुंच गई। यानी इतने नए लोग बेरोजगार हुए हैं। यह लगातार दूसरा हफ्ता था, जब इस संख्या में उछाल आया। अर्थशास्त्रियों ने इसकी वजह देश में कोरोना वायरस संक्रमण में तेजी से हुए इजाफे को बताया है। उनके मुताबिक इस वजह से बहुत से कारोबार और स्कूल फिर से बंद किए गए हैं। इससे अस्थायी कर्मचारियों के हाथ से रोजगार चला गया है।
अमेरिका में चिंता इसलिए भी बढ़ रही है, क्योंकि कोरोना महामारी आने के बाद कामगार लोगों और बेरोजगारों के लिए जो कल्याण योजनाएं शुरू की गई थीं, उनकी अवधि 31 दिसंबर को खत्म हो जाएगी। अभी की राजनीतिक अस्थिरता के बीच ये अवधि बढ़ पाएगी या नहीं, इसको लेकर आशंकाएं गहराती चली गई हैं। ऐसा नहीं हुआ, तो लाखों लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी मुहाल हो जाएगी।
नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने कोरोना महामारी को नियंत्रित करने को अपनी पहली प्राथमिकता बताया है। लेकिन इस दिशा में वे कोई कदम 20 जनवरी के बाद ही उठा पाएंगे। इस बीच अंदेशा यह है कि रोज बिगड़ते हालात के कारण स्थिति तब तक बेहद गंभीर हो चुकी होगी।