अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप स्विट्जरलैंड पहुंचे हैं। यहां उन्होंने विश्व नेताओं और उद्योग जगत के दिग्गजों से मुलाकात की। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में ट्रंप का भाषण तय समय पर शुरू हुआ। एयर फोर्स वन में तकनीकी दिक्कत के बावजूद ट्रंप समय पर दावोस पहुंचे। भाषण स्थल पर लोगों की भारी भीड़ देखी गई। ट्रंप के मंच पर आते ही तालियों से स्वागत हुआ। हालांकि भाषण के दोरान स्थल के बाहर ट्रंप के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी चल रहा था।
उन्होंने डेनमार्क को एहसान फरामोश करार देते हुए कहा कि अमेरिका दशकों से यूरोप और नाटो की सुरक्षा करता आया है, लेकिन बदले में उसे सम्मान नहीं मिला। ट्रंप ने दावा किया कि वैश्विक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण जरूरी है। आइए बिंदुवार तरीके से समझते हैं, ट्रंप ने भाषण के दौरान क्या-क्या कहा।
ग्रीनलैंड क्यों जरूरी?
ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। उनके मुताबिक यह इलाका मिसाइल चेतावनी प्रणाली और आर्कटिक क्षेत्र की निगरानी के लिहाज से रणनीतिक है। उन्होंने बिना ठोस सबूत यह भी कहा कि वहां रूसी और चीनी गतिविधियां बढ़ रही हैं। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिका ही इस विशाल बर्फीले भूभाग की सही तरीके से रक्षा कर सकता है।
यूरोप और नाटो पर हमला
ट्रंप ने नाटो और यूरोपीय देशों पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका सबसे ज्यादा योगदान देता है, लेकिन बदले में उसे कुछ नहीं मिलता। उन्होंने दावा किया कि अगर वह न होते तो नाटो कमजोर पड़ जाता। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह दावा भ्रामक है, क्योंकि 9/11 के बाद नाटो ने अमेरिका की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई और कई देशों ने अफगानिस्तान में सैनिक भी भेजे थे।
‘हां कहो तो अच्छा, ना कहो तो याद रखेंगे’
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर साफ संदेश देते हुए कहा कि अगर ग्रीनलैंड और उसके सहयोगी अमेरिका की बात मानते हैं तो अच्छा होगा, और अगर नहीं मानते तो अमेरिका इसे याद रखेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह सैन्य बल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते और बातचीत के जरिए ही ग्रीनलैंड को हासिल करना चाहते हैं। इसके बावजूद टैरिफ और दबाव की उनकी नीति ने यूरोप की चिंता बढ़ा दी है।
ग्रीनलैंड की सुरक्षा केवल अमेरिका कर सकता है- ट्रंप
दावोस में भाषण के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड को सुरक्षित रखने की क्षमता केवल अमेरिका के पास है। उन्होंने दावा किया कि पिछले करीब 200 वर्षों से अमेरिकी राष्ट्रपति ग्रीनलैंड खरीदने की कोशिश करते रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि द्वीप पर डेनमार्क की मौजूदगी के कोई ठोस संकेत नहीं हैं और डेनमार्क वहां उतना निवेश भी नहीं कर रहा, जितना उसने वादा किया था। उन्होंने ग्रीनलैंड को एक विशाल बर्फीला भूभाग बताते हुए कहा कि अमेरिका ही इसका विकास और सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है, इसी वजह से वे तत्काल बातचीत चाहते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से ग्रीनलैंड अहम- ट्रंप
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को रणनीतिक रूप से बेहद अहम बताते हुए कहा कि यह लगभग निर्जन और अविकसित क्षेत्र है, जो फिलहाल असुरक्षित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड का महत्व वहां मौजूद दुर्लभ खनिजों से ज्यादा उसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा भूमिका में है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका की सुरक्षा जरूरतें और वैश्विक स्थिरता इस क्षेत्र से सीधे जुड़ी हैं। इसी कारण वे ग्रीनलैंड को लेकर गंभीर हैं और इसे केवल एक भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़ा सवाल मानते हैं।
ग्रीनलैंड मुद्दे पर डेनमार्क के प्रति सम्मान जताया- ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि वह ग्रीनलैंड के मुद्दे को अपने भाषण से बाहर रखने वाले थे, लेकिन ऐसा करने पर उनकी आलोचना होती। उन्होंने ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों के प्रति गहरा सम्मान जताया। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनका इरादा किसी का अपमान करना नहीं है, बल्कि वह इस विषय पर खुलकर बात करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड से जुड़ा फैसला भावनाओं से नहीं, बल्कि सुरक्षा और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
ग्रीन न्यू डील को बताया सबसे बड़ा धोखा- ट्रंप
ट्रंप ने दावा किया कि उनके चुनाव जीतने से अमेरिका ग्रीन न्यू स्कैम से बच गया। उन्होंने इसे इतिहास का सबसे बड़ा धोखा करार दिया और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की आलोचना की। ट्रंप ने कहा कि यूरोप में उन्होंने देखा कि कट्टर वामपंथी नीतियों ने ऊर्जा संकट पैदा किया है। उन्होंने दावा किया कि जर्मनी में बिजली की कीमतें 64 प्रतिशत बढ़ गई हैं और ब्रिटेन अब 1999 के मुकाबले केवल एक-तिहाई ऊर्जा पैदा करता है, क्योंकि उसने नॉर्थ सी के तेल का उपयोग नहीं किया।
अमेरिका के साथ वेनेजुएला ज्यादा कमाएगा- ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि उनके कार्यकाल में तेल और गैस उत्पादन बढ़ा है, जबकि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के समय हरित नीतियों के कारण तेल की कीमतें बढ़ीं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने वेनेजुएला से पांच करोड़ बैरल तेल जब्त किया। ट्रंप के अनुसार, हालिया घटनाक्रम के बाद वेनेजुएला समझौते को तैयार हुआ। उन्होंने कहा कि अमेरिका के सहयोग से वेनेजुएला अगले छह महीनों में उतनी कमाई करेगा, जितनी उसने पिछले 20 वर्षों में नहीं की।
व्यापार समझौतों से इन देशों को फायदा
ट्रंप ने दावा किया कि एक साल में उन्होंने अमेरिका का मासिक व्यापार घाटा 77 प्रतिशत तक घटा दिया, वह भी बिना महंगाई बढ़ाए। उन्होंने कहा कि देशभर में नए स्टील प्लांट लग रहे हैं और अमेरिका ने यूरोप, जापान और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों के साथ बड़े व्यापार समझौते किए हैं। ट्रंप के मुताबिक, ये सौदे अमेरिका के कुल व्यापार के 40 प्रतिशत को कवर करते हैं और इससे न केवल अमेरिकी, बल्कि साझेदार देशों की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों को भी मजबूती मिली है।
संबोधन में और क्या-क्या बोले ट्रंप?
- अमेरिका की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है।
- अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत है और लोग अच्छा कर रहे हैं।
- घरेलू नीतिगत फैसलों को लेकर पहले जो आशंकाएं जताई गई थीं, वे गलत साबित हुईं।
- फैसलों से न तो मंदी आई और न ही महंगाई बढ़ी।
- नाटो अमेरिका के लिए मौजूद नहीं है और इसमें ग्रीनलैंड (आइसलैंड कहकर) का भी जिक्र किया।
- दावा किया कि ग्रीनलैंड को लेकर सैन्य बल की बातों से शेयर बाजार में गिरावट आई।
- अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए तुरंत बातचीत चाहता है।
- दावा किया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड डेनमार्क को लौटा दिया, जो गलती थी।
- ग्रीनलैंड बहुत महंगा है और वहां का एक बहुत बड़ा टुकड़ा बर्फ है।
- ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।
- ग्रीनलैंड के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल नहीं करेंगे।
- यूरोप से लौटने वाले दोस्त कहते हैं कि वे अब यूरोप को पहचान नहीं पाते।
- यूरोप सही दिशा में नहीं जा रहा है। यूरोप से प्यार करते हैं, लेकिन हालात चिंताजनक हैं।
- दुनिया के कुछ हिस्से हमारी आंखों के सामने बर्बाद हो रहे हैं और वहां के नेता कुछ नहीं कर रहे।
- अमेरिका की सीमाएं सुरक्षित हैं। लोग मुझसे खुश हैं और मेरी नीतियों से संतुष्ट हैं।
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