अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया के तमाम देशों पर लगाए जाने वाले पारस्परिक टैरिफ के लागू होने की तारीख बढ़ा दी है। पहले यह टैरिफ आज यानी 1 अगस्त से प्रभावी होना था। अब इसकी अगली तारीख एक हफ्ते बढ़ाकर 7 अगस्त तय की गई है। इसका मतलब है कि भारत पर लगाया जाने वाला टैरिफ भी अब आज से लागू नहीं होगा। इससे भारत को और समय मिलेगा, ताकि वह अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ अपनी रणनीति बना सके। भारत के पास इस दौरान अमेरिका के साथ जारी व्यापार समझौते को लेकर अपनी शर्तें मनवाने का भी मौका होगा।
व्यापार घाटा अधिक होने की दी दलील
अमेरिका का दावा है कि भारत के साथ उसका व्यापार घाटा काफी अधिक है। इसके लिए उसने अमेरिकी वस्तुओं पर उच्च टैरिफ लगाने के लिए नई दिल्ली को जिम्मेदार ठहराया है। अमेरिका का कहना है कि इससे भारतीय बाजार में अमेरिकी निर्यात बेहद सीमित हो जाता है। अधिक टैरिफ से यह घाटा पाटा जा सकता है।
निर्यात 18 फीसदी, आयात 6.22 फीसदी
भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत, आयात में 6.22 प्रतिशत और द्विपक्षीय व्यापार में 10.73 प्रतिशत है। वर्ष 2024-25 में, द्विपक्षीय व्यापार 186 अरब डॉलर (86.5 अरब डॉलर निर्यात और 45.3 अरब डॉलर आयात) तक पहुंच गया। अमेरिका के साथ, भारत का 2024-25 में 41 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार अधिशेष (आयात और निर्यात के बीच का अंतर) था। यह 2023-24 में 35.32 अरब अमेरिकी डॉलर और 2022-23 में 27.7 अरब डॉलर था।
अमेरिका को मुख्यत: क्या निर्यात करता है भारत?
| निर्यात (2024 में) | मूल्य |
| दवा निर्माण तथा जैविक | 8.1 |
| दूरसंचार उपकरण | 6.5 |
| कीमती, अर्ध-कीमती पत्थर | 5.3 |
| पेट्रोलियम उत्पाद | 4.1 |
| सोना व अन्य आभूषण | 3.2 |
| सहायक उपकरण सहित सूती वस्त्र | 2.8 |
| लोहा-इस्पात के उत्पाद | 2.7 |