अमेरिकी सीनेटरों के एक समूह ने अमेरिकी डॉलर को दुनिया की रिजर्व करेंसी का दर्जा देने के लिए एक प्रस्ताव फिर से पेश किया है। सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि चीन, युआन के आस-पास एक दूसरी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था बनाने की कोशिशें तेज कर रहा है। अमेरिकी सीनेटर्स के इस समूह में दोनों दलों के सांसद शामिल हैं। टेड बड और जीन शाहीन द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि युआन को अंतरराष्ट्रीय बनाने की बीजिंग की कोशिश से अमेरिका और उसके साथियों के लिए आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा है।
अमेरिकी सांसदों ने युआन के बढ़ते प्रभाव पर क्या कहा?
प्रस्ताव के साथ जारी एक बयान में बड ने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लगातार सहयोग और लगातार सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि अमेरिकी डॉलर ग्लोबल रिजर्व करेंसी के तौर पर अपना स्टेटस बनाए रखे।' उन्होंने कहा, 'वर्षों से, चीन, अमेरिका और हमारे साझेदारों की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को निशाना बनाते हुए अपने वैश्विक वित्तीय असर को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।'
बड ने चेतावनी दी कि चीन को 'ग्लोबल करेंसी फ्लो को बढ़ाने और दूसरा फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की इजाजत देना नीति की विफलता होगी जो दुनिया की अर्थव्यवस्था को विभाजित कर सकता है। इससे फ्री मार्केट की लगातार ग्रोथ को खतरा हो सकता है, खासकर विकासशील देशों में।' उन्होंने कहा, अमेरिकी डॉलर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिरता और खुशहाली लाने वाली भूमिका बनाए रखनी चाहिए।
'डॉलर का दबदबा, अमेरिकी ताकत से जुड़ा'
शाहीन ने कहा कि डॉलर का दबदबा सीधे तौर पर अमेरिकी आर्थिक ताकत और ग्लोबल असर से जुड़ा है। उन्होंने कहा, 'अमेरिकी डॉलर को ग्लोबल रिजर्व करेंसी के तौर पर बनाए रखना न सिर्फ अमेरिकी अर्थव्यवस्था की लंबे समय की स्थिरता और खुशहाली के लिए जरूरी है, बल्कि यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए भी बहुत जरूरी है।' इसमें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के डेटा का जिक्र है, जिससे पता चलता है कि 1999 में ग्लोबल करेंसी रिजर्व में डॉलर का हिस्सा लगभग 71 फीसदी था, लेकिन 2025 की तीसरी तिमाही तक यह घटकर 56.82 फीसदी रह गया। इसी समय के दौरान चीनी युआन का हिस्सा 1.93 फीसदी था।
कैसे बढ़ रहा युआन का दबदबा?
अमेरिकी सांसदों ने चीन पर नॉन-मार्केट, फिक्स्ड एक्सचेंज रेट बनाए रखने का भी आरोप लगाया गया है। इससे युआन की कीमत कम रहती है और व्यापार में असंतुलन पैदा होता है। सांसदों ने चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की ओर इशारा किया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि इससे विकासशील देशों में चीनी कैपिटल पर निर्भरता बढ़ गई है। प्रस्ताव में कहा गया है कि बीजिंग ने 2013 से इस इनिशिएटिव के तहत दुनिया भर में 1 खरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि 1,700 से ज्यादा बैंकों ने चीन के क्रॉस-बॉर्डर इंटरबैंक पेमेंट सिस्टम या सीआईपीएस को सब्सक्राइब किया है, जिसे वह स्विफ्ट फाइनेंशियल मैसेजिंग सिस्टम का विकल्प बताता है। चेतावनी दी गई है कि ताइवान से जुड़े किसी संकट या हिंद-प्रशांत शिपिंग लेन में रुकावट की स्थिति में चीन की पैरेलल फाइनेंशियल सिस्टम बनाने की कोशिशों से पश्चिमी देशों का असर कमजोर हो सकता है। प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिका को जरूरी इलाकों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने चाहिए और बीजिंग के वित्तीय असर का मुकाबला करते हुए विकासशील देशों में ग्रोथ और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सहयोगियों के साथ काम करना चाहिए।