रूस के कद्दावर नेता दिमित्री मेदवेदेव ने दावा किया है कि ईरान पहले ही अपनी सबसे बड़ी ताकत का 'परीक्षण' कर चुका है। मेदवेदेव ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान का असली परमाणु हथियार बताया है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने की क्षमता रखता है।
पश्चिम एशिया से 40 दिनों बाद राहत की खबर आई है। दरअसल, अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच सीजफायर का एलान हो गया। तीनों देशों ने दो हफ्ते के लिए शांति की राह को अपनाया है। इस बीच रूस ने अमेरिका पर तंज कसा है। रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और देश के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
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मेदवेदेव ने कहा है कि ईरान को अपनी ताकत दिखाने के लिए किसी पारंपरिक परमाणु बम की जरूरत नहीं है, क्योंकि उसके पास होर्मुज के रूप में एक ऐसा 'परमाणु हथियार' है जिसका परीक्षण वह पहले ही कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कैसे हुआ, स्पष्ट नहीं है।
क्या है मेदवेदेव के बयान का मतलब?
मेदवेदेव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम का एलान हो चुका है। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि लोग ईरान के यूरेनियम संवर्धन और मिसाइलों पर नजर रख रहे हैं, लेकिन असली खतरा समुद्री रास्ते होर्मुज में छिपा है। मेदवेदेव ने संकेत दिया है कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर देता है, तो इसका असर किसी परमाणु विस्फोट से कम नहीं होगा। यह वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा देगा और पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था को घुटनों पर ला देगा।
दुनिया की रग है 'होर्मुज'
भौगोलिक दृष्टि से देखें तो होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलएनजी यहीं से होकर गुजरती है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने बार-बार इस रास्ते पर पाबंदी लगाने की धमकी देकर यह साबित कर दिया है कि उसकी भौगोलिक स्थिति ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
रूस के पूर्व राष्ट्रपति मेदवेदेव का कहना है कि ईरान की यह 'अक्षय क्षमता' उसे किसी भी महाशक्ति से टकराने का साहस देती है। जब वे इसे 'परमाणु हथियार' कहते हैं, तो उनका इशारा उस तबाही की ओर होता है जो तेल की सप्लाई रुकने से पूरी दुनिया में मचेगी। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी युद्धविराम हुआ है। लेकिन जमीन पर स्थिति इसके उलट है। सीजफायर के एलान के बाद भी कई इलाकों में ड्रोन अटैक देखा गया है।