अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा है कि हम संभावित समझौता करने के निकट हैं, लेकिन अभी यह हुआ नहीं है। आने वाले कुछ समय में यह स्पष्ट होगा कि हम यह समझौता कर पाएंगे या नहीं।
यूक्रेन पर रूसी हमलों के बीच राजनयिक 2015 में हुए ईरान परमाणु समझौते को बचाने की कोशिश कर रहे हैं और संघर्ष के कारण ध्यान भटकने के बावजूद वार्ता को आगे बढ़ा रहे हैं। वे अब ऐसा समझौता करने के निकट पहुंचते प्रतीत होते हैं, जिससे समझौते में अमेरिका की वापसी हो जाएगी और ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम पर सीमा का पालन करने के लिए राजी किया जा सकेगा।
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विएना में 11 महीने से वार्ता जारी है। अमेरिकी अधिकारियों और अन्य का कहना है कि केवल कुछ मामलों को सुलझाया जाना शेष है। ईरान और अमेरिका समझौते संबंधी अंतिम निर्णय पर पहुंचने को लेकर एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे है, जिसके कारण समझौता लटका हुआ है, जबकि सभी संबंधित पक्ष इसे एक जरूरी मामला मानते हुए जल्द सुलझाना चाहते हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा, हम संभावित समझौता करने के निकट हैं, लेकिन अभी यह हुआ नहीं है। हम आगामी कुछ समय में यह पता लगाएंगे कि हम यह समझौता कर पाएंगे या नहीं। उधर, जर्मनी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता क्रिस्टोफर बर्गर ने कहा कि अंतिम पाठ का मसौदा तैयार करने का काम पूरा हो गया है और राजधानियों में अब जरूरी राजनीतिक फैसले किए जाने शेष हैं, जो जल्द ही हो जाएंगे।
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ब्रिटिश नागरिकों की रिहाई से आशा की किरण
ईरान द्वारा हिरासत में बंद दो ब्रिटिश नागरिकों को रिहा किए जाने के बाद समझौते की प्रगति के संबंध में आशा की एक नई किरण मिली। अमेेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि यदि कैदियों के मामले को सुलझा लिया गया, तो परमाणु वार्ता के बीच अंतर को जल्द पाटा जा सकता है। जबकि ईरानी विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियन ने कहा कि समझौता पूरी तरह वाशिंगटन पर निर्भर करता है।