कतर के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोहा में कतर और पाकिस्तान ने अमेरिकी व ईरानी प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई।
कतर के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार कतर और पाकिस्तान ने दोहा में अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के साथ अलग-अलग बैठकें संपन्न कीं। जिनमें 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) से संबंधित मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई।
प्रधानमंत्री के सलाहकार ने क्या बताया?
बैठक में क्या हुआ?
तसनीम न्यूज एजेंसी के अनुसार ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम रारीबाबादी ने कहा 'हमने दोहा बैठक में लेबनान में प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में अमेरिका की विफलता का मुद्दा उठाया था।' उन्होंने आगे कहा कि कतर के अधिकारियों के साथ बैठकों में 6 अरब अमेरिकी डॉलर के एक हिस्से के खर्च से संबंधित मुद्दों की समीक्षा की गई। इसके साथ ही इस बैठक में यह सहमति हुई कि घोषित जरूरतों के आधार पर, आवश्यक वस्तुओं की खरीद की जाएगी। उन्हें ईरान के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।'
पूर्व सर्वोच्च नेता की अंतिम यात्रा कब से है?
इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान का परमाणु निरस्त्रीकरण अच्छी तरह चल रहा है। कतर में वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों की भागीदारी वाली उच्च स्तरीय वार्ता से ईरान की अनुपस्थिति के बावजूद इस्लामिक गणराज्य के साथ राजनयिक प्रक्रिया के बारे में आशावाद व्यक्त किया था। नवनिर्मित थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी का दौरा करने के लिए नॉर्थ डकोटा रवाना होते समय पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों के जवाब में इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ हाल ही में की गई सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा सकारात्मक रूप से आगे बढ़ी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि हालिया हमलों के बाद ईरान ने अपना रुख बदल लिया है। तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर वाशिंगटन के लंबे समय से चले आ रहे रुख को दोहराते हुए, ट्रंप ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, 'ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते। अन्यथा, हम जिन चीजों की जांच करते हैं, जो भी कार्रवाई करते हैं, उससे यह स्पष्ट होता है कि देश में पहले कभी इस तरह की गतिविधि नहीं हुई है जैसी कि अभी हो रही है।'