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उपलब्धि: देवसहायम पिल्लै को पोप ने घोषित किया संत, यह उपाधि पाने वाले पहले साधारण भारतीय शख्स

Sun, 15 May 2022 08:48 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वेटिकन सिटी

सार

23 अप्रैल 1712 को कन्याकुमारी के एक हिंदू नायर परिवार में जन्मे पिल्लै ने साल 1745 में ईसाई धर्म स्वीकार किया था और अपना नाम 'लैजरस' रख लिया था। 
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देवसहायम पिल्लै - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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18वीं सदी में ईसाई धर्म स्वीकार करने वाले देवसहायम पिल्लै रविवार को पहले ऐसे साधारण भारतीय बन गए जिन्हें पोप फ्रांसिस ने संत घोषित किया। इस दौरान पोप ने वैश्विक नेताओं से एक बार फिर अपील की कि वे शांति के नायक हो सकते हैं, युद्ध के नहीं।

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पोप फ्रांसिस ने सेंट पीटर्स बेसिलिका में आयोजित एक कार्यक्रम में कैनोनाइजेशन (मृत व्यक्ति को आधिकारिक तौर पर संत की उपाधि देने की प्रक्रिया) के दौरान देवसहायम को संत घोषित किया। 10 नए संतों के सम्मान में वेटिकन में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में दुनियाभर के 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं समेत सरकारी प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुए। 

देवसहायम को मोक्ष प्राप्ति की प्रक्रिया के लिए तमिलनाडु के बिशप काउंसिल और कॉन्फ्रेंस ऑफ कैथोलिक बिशप्स ऑफ इंडिया के अनुरोध पर वेटिकन ने साल 2004 में सिफारिश की थी। पोप फ्रांसिस ने साल 2014 में देवसहायम से जुड़े एक चमत्कार को मान्यता दी थी, जिसके बाद उन्हें संत की उपाधि मिलने का रास्ता स्पष्ट हो गया था। 
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वेटिकन में पिछले दो वर्षों में आयोजित हुआ यह पहला कैनोनाइजेशन समारोह था। पिछले कुछ महीनों से अपने दाएं घुटने में समस्या की शिकायत कर रहे पोप फ्रांसिस एक व्हीलचेयर पर समारोह में शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने दुनिया से जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया। 

इन 10 लोगों को दी गई संत की उपाधि
समारोह की शुरुआत में पोप ने 10 नए संत घोषित किए। इनमें छह पुरुष और चार महिलाएं शामिल रहीं। इनके नाम टाइटर ब्रैंड्स्मा, लैजरस देवसहायम, सीजर डि बस, लुइगी मारिया पोलाज्जोलो, गस्टीनो मारिया रुसोलिल्लो, चार्ल्स डि फोकॉल्ड, मारिया रिवर, मारिया फ्रेंसेस्का ऑफ जीसस रबाटो, मारिया ऑफ जीसस सैंटोकनाल और मारिया डोमेनिका मंटोवानी शामिल हैं। 

1712 में कन्याकुमारी में हुआ था जन्म
जब देवसहायम के नाम का एलान किया गया तो समारोह में मौजूद तिरंगा लिए लोगों ने खुशी व्यक्त की। प्रक्रिया पूरी होने के बाद पिल्लै पहले आम भारतीय बन गए जिन्हें संत घोषित किया गया है। 23 अप्रैल 1712 को कन्याकुमारी के एक हिंदू नायर परिवार में जन्मे पिल्लै ने साल 1745 में ईसाई धर्म स्वीकार किया था और अपना नाम लैजरस रख लिया था। 

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